प्रतीकात्मक फोटो.
दुनिया में आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए अपने प्रयास और तेज कर दिए हैं. FATF ने कहा है कि वह अपनी ग्लोबल नेटवर्क के तहत 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों को समर्थन दे रहा है, ताकि वे आतंकवाद के खिलाफ वित्तीय निगरानी और खुफिया जानकारी का रणनीतिक रूप से उपयोग कर सकें.
FATF ने आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करने के लिए वित्तीय खुफिया (Financial Intelligence) को सबसे ताकतवर हथियार बताया है. संस्था के अनुसार, दुनिया में होने वाले आतंकी हमलों के पीछे आर्थिक संसाधन सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं, जिन्हें रोकना जरूरी है.
FATF ने विशेष रूप से 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुए इसे एक गंभीर चेतावनी बताया है. संगठन का कहना है कि इस तरह के हमले बिना फंडिंग और नेटवर्क के संभव नहीं होते.
FATF की नई रणनीति
FATF ने अपनी नई रणनीति में खासतौर पर तीन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया है:
- सोशल मीडिया और क्राउड फंडिंग का दुरुपयोग
- वर्चुअल एसेट्स के ज़रिए हो रही फंडिंग
- वित्तीय खुफिया का सटीक और समय पर उपयोग
FATF जल्द ही आतंकी वित्तपोषण पर एक विस्तृत विश्लेषण जारी करने वाला है, जिसमें दुनियाभर से जुटाए गए मामलों का अध्ययन और उदाहरण शामिल होंगे. इसके अलावा, एक वेबिनार के माध्यम से सरकारी और निजी क्षेत्रों को उभरते खतरों के प्रति सतर्क रहने और उन्हें समझने में मदद दी जाएगी.
FATF अध्यक्ष का बयान
FATF के अध्यक्ष ने हाल ही में म्यूनिख में आयोजित No Money for Terror Conference में कहा, “कोई एक संस्था, सरकार या देश अकेले आतंकवाद को नहीं हरा सकता. हमें आतंक के इस वैश्विक खतरे के खिलाफ एकजुट होना होगा. आतंकवादियों को केवल एक बार सफल होना होता है, लेकिन हमें हर बार उन्हें रोकने में सफल होना चाहिए.”
FATF का यह सख्त रुख उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब दुनिया भर में आतंकी हमलों की फंडिंग के लिए नए रास्ते जैसे क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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