Child Marriage Case: बाल विवाह के खिलाफ दायर नाबालिग लड़की की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और दिल्ली पुलिस से 15 जुलाई तक स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने बिहार के डीजीपी और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को लड़की और उसके दोस्त को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया है.
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने यह आदेश दिया है. कोर्ट 15 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. याचिकाकर्ता लड़की की उम्र 16 साल 6 महीने की है.
याचिका में कहा गया है कि लड़की की शादी जबरन 32 वर्षीय व्यक्ति से कराई गई, जबकि वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती थी. उनसे यह भी कहा है कि ससुराल में उसका शारीरिक शोषण और मानसिक प्रताड़ना दी गई.
शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप
याचिका में कहा गया है कि उसके ससुराल वालों ने दावा किया कि उन्होंने शादी के लिए बहुत पैसा दिया और खर्च किया और बार-बार उससे कहा कि वे एक बच्चा चाहते हैं. उन्होंने अधिकारियों को अपनी और अपने.दोस्त की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है. याचिका में संविधान के अनुच्छेद 32 और 142 का हवाला देते हुए कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह बालिका के हित में हस्तक्षेप कर जबरन हुए इस बाल विवाह को अवैध घोषित करे और उसके मौलिक अधिकारों की रक्षा करें.
साथ ही याचिकाकर्ता ने कोर्ट से खुद और अपने दोस्त सौरभ कुमार व उसके परिवार की सुरक्षा की मांग की है. इसके अलावे दर्ज एफआईआर के आधार पर किसी तरह की दण्डात्मक कार्रवाई न करने का अनुरोध किया है. बता दें कि लड़की की मां ने 4 अप्रैल 2025 को पटना के पिपलावा थाना में एफआईआर संख्या 59/25 दर्ज कराई, जिसमें लड़की के दोस्त और उसके परिवार पर अपहरण का आरोप लगाया गया, ताकि लड़की को वापस ससुराल भेजा जा सके.
याचिकाकर्ता का कहना है कि उसकी शादी बिना उसकी सहमति के कराई गई. ससुराल में उसे शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया गया. जिसके कारण वह वहां नही रहना चाहती.
लड़की ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि उसकी शादी को अवैध घोषित किया जाए, ताकि वह अपनी पढ़ाई और जिंदगी को नए सिरे से शुरू कर सके. उसने यह भी बताया कि वह अपनी मर्जी से अपने दोस्त सौरभ कुमार के साथ रह रही है, जो उसका समर्थन कर रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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