Urdu Conclave 2026

दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश, राजपूताना राइफल्स के लिए फुट-ओवर ब्रिज निर्माण योजना को अंतिम रूप दें

दिल्ली हाईकोर्ट ने छावनी क्षेत्र में परेड मैदान जाने वाले राजपूताना राइफल्स के जवानों की सुविधा के लिए फुट-ओवर ब्रिज निर्माण की योजना को अंतिम रूप देने और जलभराव रोकने के निर्देश दिए हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली छावनी क्षेत्र में परेड मैदान जाने के लिए राजपूताना राइफल्स के तीन हजार से अधिक सैनिकों के लिए फुट-ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए प्रस्तावित योजना को अंतिम रूप दी जाए और बजट, डिजाइन और निर्माण की समय-सीमा से संबंधित रिपोर्ट देने को कहा है. संबंधित प्रस्ताव को तलब किया है.

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह की पीठ ने लोक निर्माण विभाग, दिल्ली छावनी बोर्ड और ट्रैफिक पुलिस को संयुक्त बैठक करने को कहा है. ताकि फुट-ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए समाधान निकाला जा सके, जिससे राजपूताना राइफल्स को इस मार्ग को पार करने में सहूलियत हो.

समयसीमा पर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि नाले में जलभराव न होने दिया जाए ताकि सैनिकों की आवाजाही में कोई बाधा न आए, इसके अलावे कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि नाले से पानी निकालने की प्रक्रिया की नियमित निगरानी किया जाए.

बता दें कि प्रस्तावित परियोजना को वर्ष 2000 में ही स्वीकृति मिल चुकी थी, लेकिन अभी तक उसका निर्माण नही हुआ है. इससे पहले कोर्ट ने संबंधित स्थिति रिपोर्ट के साथ तस्वीरें पेश करने का आदेश दिया था. अधीक्षण अभियंता और लोक निर्माण विभाग के वकील ने कोर्ट को बताया था कि क्रासिंग के वास्ते पैदल पार पथ (एफओबी) के निर्माण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है.

ट्रैफिक पुलिस को संयुक्त बैठक का निर्देश

कोर्ट ने कहा था कि एफओबी का काम अपनी गति से होना चाहिए, लेकिन पीडब्ल्यूडी को तुरंत क्षेत्र की सफाई करनी चाहिए. मलबा और मिट्टी हटानी चाहिए तथा दीवारों को साफ करना चाहिए.  कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि नाले से मार्च करने वाले जवानों से संबंधित समाचार पत्र की रिपोर्ट वास्तव में एक अस्वीकार्य स्थिति है.

कोर्ट ने फरवरी में विशेष कार्य बल को दिल्ली में तैमूर नाले के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करने वाले सभी अवैध अतिक्रमणों और निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया था. उसमें एक पांच मंजिला इमारत भी शामिल है. उसने कहा था कि नाले को गिराने और विस्तार करने का काम सही तरीके से जारी रहना चाहिए.

साथ ही नाले की सफाई एक सतत रूप में की जानी चाहिए. उसके तहत सुबह व शाम कम से कम दो बार काम किया जाना चाहिए. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नाले के आसपास के कचरे की सफाई एमसीडी की जिम्मेदारी होगी.

ये भी पढ़ें: दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, पार्दटनर बदलने के लिए मजबूर कर यौन शोषण करने वाले पति को जमानत से इनकार

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read