सांकेतिक तस्वीर
दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्नी को कथित तौर पर साथी बदलने (पार्टनर स्वैप) के लिए मजबूर करने और अन्य लोगों को उसके साथ यौन संबंध बनाने के लिए सोशल मीडिया पर पेशकर करने के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि व्यक्ति पर महज पारंपरिक वैवाहिक विवाद के आरोपों को लेकर मामला दर्ज नहीं किया गया है.
जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप पारंपरिक वैवाहिक विवाद के नहीं है. उन्होंने महिला के इस आरोप पर विचार किया गया उसका एक रिश्तेदार उसे अनुचित तरीके से छूकर उसका यौन उत्पीड़न करता था तथा उसकी लज्जा भंग करता था जब उसने इसकी अपने पति से शिकायत की तो उसने उसे इन सबको नजरअंदाज करने को कहा. जिसके बाद आरोपी पर बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन उत्पीड़न, क्रूरता तथा विश्वासघात सहित अन्य अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया है.
सामूहिक दुष्कर्म सहित कई गंभीर धाराएं
कोर्ट ने प्राथमिकी का हवाला देते हुए कहा कि उसका पति ब्लेड से उसका हाथों को चोट पहुचाता था. उसी जख्मी हाथों से किचन का काम करवाता था. आरोपी पति ने उस पर पत्नी अदला बदली के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया था. इसके लिए वह उसे होटल में ले गया. वहां उसके दोस्तों ने उसके साथ छेड़खानी की. इसलिए वह भाग गई. आरोपी पर महिला का फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाने और उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने के अलावा लोगों को पैसे के बदले उसके साथ यौन संबंध बनाने की पेशकश करने का भी आरोप है.
कोर्ट ने कहा कि इस तरह के गंभीर आरोपों के अलावा महिला ने एक मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष अपना बयान भी दर्ज कराया है. उसमें उसने बलात्कर और सामुहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है. इसके अलावा ऐसा लगता है कि इससे पहले जब अग्रिम जमानत दी गई थी, तो आरोपी ने पीड़िता से संपर्क किया था. उसके.साथ दूसरे.सीम कार्ड से एक काल्पनिक नाम से चैट किया था. उसकी प्रतियां रिकॉर्ड में है. लेकिन जांच में वह सीम उसके नाम पर पंजीकृत पाया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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