CLAT PG 2025 Counselling: काउंसिलिंग के लिए कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (सीएलएटी) के पीजी अभ्यर्थियों से कंसोर्टयिम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयूएस) की ओर से 50 हजार से ज्यादा फीस लेने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुच गया है. दिल्ली हाई कोर्ट में एनएलयूएस के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई है.
याचिका में कहा गया है कि यह फीस बहुत ज्यादा है. जस्टिस प्रतिबा मनिंदर सिंह एवं जस्टिस रजनीश कुमार की पीठ के समक्ष मेंशनिग कर जल्द सुनवाई की मांग की गई. कोर्ट 23 जून को याचिका पर सुनवाई करेगा. इतनी ज्यादा फीस वसूले जाने को जतिन श्रीवास्तव ने चुनौती दी है.
उन्होंने कहा है कि बिना कोई आधार के मनमानी फीस वसूली जा रही है. इसे काफी कम होनी चाहिए. उसने परीक्षा में 474 रैंक हासिल की है. उसे काउंसिलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पहले 30 हजार रुपए जमा करना होगा और उसके बाद काउंसलिंग के प्रत्येक दौर में भाग लेने के लिए 20 हजार रुपए अनिवार्य रूप से देना होगा.
इसके अलावा सीट कंफर्म करने के लिए भी उतनी ही राशि देना होगा, जिसे वापस नहीं किया जाएगा. इस तरह से वह जितना बार सीट कंफर्म करना चाहेगा तो उसे 20-20 हजार रुपए देने होंगे. जबकि काउंसिलिंग तीन बार होना है.
याचिका में कहा गया है कि इतनी अधिक फीस लेने के बारे में कभी सुना नहीं है. इसका उस उद्देश्य और लक्ष्य से कोई संबंध नहीं है, जिसके लिए काउंसलिंग आयोजित की जा रही है. इतनी अधिक फीस वसूलना न केवल भेदभावपूर्ण और असंगत है, बल्कि उन लोगों के लिए भी परेशानी पैदा करने वाला है जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है.
-भारत एक्सप्रेस
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