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“प्रस्तावना से समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द प्रस्तावना से हटाने पर हो विचार” संविधान पर RSS का बड़ा बयान, जानें दत्तात्रेय होसबाले ने क्या कहा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले (Dattatreya Hosabale) ने संविधान की प्रस्तावना में शामिल दो शब्दों, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष को लेकर बहस की आवश्यकता पर बल दिया.

Dattatreya Hosabale

आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले (Dattatreya Hosabale) ने संविधान की प्रस्तावना में शामिल दो शब्दों, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष को लेकर बहस की आवश्यकता पर बल दिया.

दत्तात्रेय होसबाले ने क्या कहा?

दत्तात्रेय होसबाले (Dattatreya Hosabale) ने यह टिप्पणी आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की. होसबोले ने कहा, “आपातकाल के दौरान संविधान में ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ शब्द जोड़े गए, जो डॉ. अंबेडकर द्वारा निर्मित मूल प्रस्तावना का हिस्सा नहीं थे. उस समय देश में न तो संसद सामान्य रूप से कार्य कर रही थी, न ही नागरिक अधिकार थे, न ही स्वतंत्र न्यायपालिका. फिर भी इन दो शब्दों को संविधान में जोड़ दिया गया. यह तय होना चाहिए कि ये शब्द रहें या नहीं. इस पर सार्वजनिक चर्चा जरूरी है.”

कांग्रेस पर Dattatreya Hosabale का हमला

उन्होंने इस अवसर पर कांग्रेस और विशेष रूप से राहुल गांधी पर भी बिना नाम लिए निशाना साधा. जिन लोगों ने आपातकाल थोपा था, वे आज संविधान की प्रतियां लेकर घूम रहे हैं. उन्होंने आज तक देश से माफी नहीं मांगी है. होसबाले (Dattatreya Hosabale) ने कहा. “एक लाख से अधिक लोगों को जेल में डाला गया, 250 से ज्यादा पत्रकारों को कैद किया गया, मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ, और 60 लाख लोगों की जबरन नसबंदी कराई गई. न्यायपालिका की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई. क्या इन सबके लिए किसी ने देश से क्षमा मांगी है? अगर यह काम आपके पूर्वजों ने किया था, तो भी आपको उनके नाम पर माफी मांगनी चाहिए.”

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खड़गे ने किया पलटवार

इसके जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा, “जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम या संविधान निर्माण में कोई भूमिका नहीं निभाई, वे आज इसके रक्षक बनने का दावा कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी उस दौर को बार-बार याद दिला रहे हैं जिसे देश पीछे छोड़ चुका है. वह ऐसे मुद्दों को उठा रहे हैं जिन्हें जनता अब भूल चुकी है.”

केंद्र सरकार की ओर से विशेष आयोजन

भाजपा के नेतृत्व में विभिन्न राज्यों में आपातकाल-विरोधी कार्यक्रम आयोजित किए गए. इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपातकाल के दौरान संघर्ष करने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया और दो मिनट का मौन रखकर उस समय किए गए अत्याचारों का विरोध दर्ज कराया.

-भारत एक्सप्रेस



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