CRPF
देश के कई राज्यों में नक्ससलवाद की समस्या बनी हुई है और नक्सलियों ने अपने साथ महिला विंग भी तैयार कर ली है जिसके कारण वह उनको ढाल बनाकर भाग निकलने में सफल हो जाते हैं, ये नक्सली महिलाएं भी अत्याधुनिक हथियारों से लैस हैं. इन्हीं नक्सली महिलाओं के कारण सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षाबलों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसीलिए इन महिला नक्सलियों को भी सुरक्षा बलों ने अपने निशाने पर लिया और कई ऑपरेशन चलाकर एक तिहाई महिला विंग को समाप्त कर दिया है.
अभी हाल में ही नारायणपुर के अबूझमाड़ मूडभेड़ में 6 लाख रूपये की 2 महिला नक्सलियों को मार गिराया, इनके पास भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद हुए हैं. बस्तर रेंज के आई जी सुंदरराज पी ने इसे एक बड़ी कामयाबी बताया. नक्सलियों के खिलाफ केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की संयुक्त पहल काफी कामयाब हो रही है. अभी हाल में ही छत्तीसगढ, तेलांगना और महाराष्ट्र की सीमा पर भी 5 नक्सलियों को मार गिराया गया.
2 वर्षों में काफी नक्सलियों का सफाया
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ में मारे गए नक्सलियों की संख्या 217 थी, इनमें 74 महिलाएं थीं. वर्ष 2025 में 25 जून तक 195 नक्सलियों को मारा गया, जिनमें 82 महिला नक्सली थीं. वर्ष 2019, 2020,2021,2022 और 2023 में मारे गए नक्सलियों की संख्या क्रमशः 65,40,51,30 और 20 थी, इनमें क्रमशः 17,07,13,09 और 5 नक्सली महिलाएं थीं.
सुरक्षा बलों की ( नक्सली अभियान )रणनीति
सुरक्षा बलों ने नक्सलियों को खत्म करने के लिए एक व्यापक रणनीति बनाई है जिसके तहत हेलीकॉप्टर का उपयोग कर जंगल में गहराई तक सैनिकों को उतारा जा रहा है. CRPF और इसकी कोबरा बटालियन, छत्तीसगढ़ के जिला रिजर्व गार्ड, स्पेशल टास्क फोर्स और आंध्र प्रदेश के ग्रेहाउंडस जैसे विशेष बल शामिल हैं.
कई बड़े शीर्ष नक्सली कमांडर निशाने पर
सुरक्षा बलों का इन दिनों मुख्य उद्देश्य नक्सलियों के मुख्य कमांडर जिनमें हिडमा, देवा और दामोदर आदि को मार गिराना है. इन बड़े नक्सली कमांडर के खतम होने का असर अन्य नक्सलियों पर पड़ेगा जिससे वह नक्सलवाद का रास्ता त्याग कर मुख्य धारा में आने का रास्ता भी चुन सकते है, केंद्र सरकार ने इन सभी नक्सलियों को मुख्य धारा में लाने के लिए कई योजनाएं भी बनाई हैं जिसके तहत ये अपना जीवन यापन अच्छी तरीके से व्यतीत कर सकते हैं.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सलवाद खत्म करने की समय सीमा की तय
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सलवाद को खत्म करने की समय सीमा मार्च 2026 तय की है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इसके लिए सुरक्षाबलों के आला अधिकारियों लगातार दिशा निर्देश दे रहे हैं. इसीलिए पिछले वर्षों की तुलना में ऑपरेशन बढ़ने के साथ साथ नक्सलियों के सफाया भी ज्यादा बढ़ गया है.
नक्सल प्रभावित बस्तर तक पहुंचेगा रेल नेटवर्क
रेल विभाग ने तेलंगाना से नक्सल प्रभावित बस्तर को को रेल मार्ग से जोड़ने की कवायद तेज कर दी है. इसके लिए 160 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक को बनाने के लिए अंतिम स्थल सर्वेक्षण किया जा चुका है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना में नक्सल प्रभावित सुकमा,दंतेवाड़ा,बीजापुर और बस्तर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. यह रूट कोटागुडेम (तेलंगाना) किरुंदल (छत्तीसगढ़) प्रस्तावित है.
नक्सलवाद को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कार्य कर रहे हैं जिससे नक्सलियों के हौसले पस्त हो रहे हैं और केंद्रीय सुरक्षाबलों के विशेष कमांडो लगातार लाखों रुपए के ईनामी नक्सली कमांडरो को मार गिराने में सफल हो रहे हैं. नक्सल प्रभावित राज्यों में नक्सलवाद खत्म होने की उम्मीद भी जागने लगी है और लोगों को लगने लगा है कि अब यहां गोलीबारी का माहौल खत्म होगा और शांति स्थापित होगी, यहां रहने वाले लोग अमन चैन से अपना जीवन यापन कर सकेंगे.
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