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Pyre Film UK Premiere: 16वें लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाएगी विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर’, देशभर में हासिल कर चुकी बड़ी उपलब्धियां

Pyre Film UK Premiere: मशहूर फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी की हिंदी फिल्म ‘पायर’ ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है.’पायर’ का अब यूरोप के सबसे बड़े दक्षिण एशियाई फिल्मी मंच ‘लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल’ में प्रीमियर होगा. इसके अलावा यह फिल्म इंग्लैंड के बर्मिंघम में भी प्रदर्शित की जाएगी.

UK Premiere Pyre

फोटो: विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर’

Pyre Film UK Premiere: भारतीय फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर’ ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस हिंदी फिल्म का अब यूरोप के सबसे बड़े दक्षिण एशियाई फिल्मी मंच ‘लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल’ में प्रीमियर होगा. इसके अलावा यह फिल्म इंग्लैंड के बर्मिंघम में भी प्रदर्शित की जाएगी. इस फिल्म के निर्माता देश के नेशनल अवॉर्ड विजेता फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी हैं, यह इमोशनल फिल्म अब तक बहुत-से दर्शकों का दिल जीत चुकी है.

‘पायर’ का यूके प्रीमियर इसी महीने (22 जुलाई 2025 को) लंदन स्थित BFI साउथबैंक में होगा. इसके बाद 23 जुलाई को ‘पायर’ का बर्मिंघम में भी प्रीमियर होगा. इससे जुड़ा एक पोस्टर रिलीज किया जा चुका है.

Pyre film

विनोद कापड़ी की यह फिल्म हिमालय की पृष्ठभूमि पर आधारित है. ‘पायर’ में एक बुजुर्ग जोड़े के बारे में दिखाया गया है. वह एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन बदलते पहाड़ी समाज में जीवित रहने के लिए संघर्ष करते हैं. इससे पहले भी इस फिल्म ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं.

साल 2024 में आई यह फिल्म उत्तराखंड के हिमालयी गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित है. पायर को इससे पहले 2024 के टालिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल में ऑडियंस अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है. फिल्म में एक बुजुर्ग दंपती पदम सिंह और हीरा देवी की जिंदगी को दिखाया गया है, जो गांव से बड़े शहरों में पलायन के कारण अकेलेपन का सामना कर रहे हैं. हिंदी में बनी इस 111 मिनट की फिल्म को अंग्रेज़ी सबटाइटल्स के साथ दिखाया गया.

उत्तराखंड के पहाड़ों से उभरी इसकी कहानी

विनोद कापड़ी ने पहले भी पिहू (2016) और 1232 KMs (2021) जैसी संवेदनशील फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाई है. पायर की कहानी का बीज उन्हें 2017 में उत्तराखंड के मुंसियारी में मिला, जहां पलायन से उजड़े गांव ने उन्हें गहरे प्रभावित किया.

खास बात यह है कि फिल्म के मुख्य कलाकार – पदम सिंह, जो रिटायर्ड आर्मी जवान हैं, और हीरा देवी, एक किसान – पेशेवर अभिनेता नहीं हैं. पहाड़ के छोटे से गांव बेरिनाग तहसील से आने वाले इन दोनों ने पहली बार कैमरे का सामना किया. उनके स्वाभाविक अभिनय को समीक्षकों ने “अद्भुत” कहा है. कापड़ी ने बताया, “जब भी अम्मा-बुबू फिल्म में रोते हैं, वे सच में रो रहे होते हैं. ये उनकी असली जिंदगी का हिस्सा है.”

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-भारत एक्सप्रेस 



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