प्रतीकात्मक फोटो.
ओडिशा के झारसुगुड़ा में पुलिस छापेमारी में अब तक 400 से अधिक लोगों को बांग्लादेशी होने के संदेह के आधार पर हिरासत में लिया गया है. पश्चिम बंगाल ने इसका विरोध जताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की है.
पश्चिम बंगाल सरकार हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल रिहाई की मांग के बीच ओडिशा पुलिस ने बुधवार को कहा कि सत्यापन प्रक्रिया चल रही है और आवश्यक वैध दस्तावेज जमा करने वालों को रिहा कर दिया जाएगा. पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि हिरासत में लिए गए लोग पश्चिम बंगाल के विभिन्न ज़िलों से हैं, जिनमें नादिया, मुर्शिदाबाद, मालदा और पूर्वी मेदिनीपुर शामिल हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक झारसुगुड़ा में सोमवार को हुई छापेमारी के एक नए दौर में 200 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया. अब तक 444 लोगों को ‘बांग्लादेश से अवैध प्रवासी’ होने के संदेह में हिरासत में लिया गया है और ज़िले के दो डिटेंशन सेंटरों में रखा गया है.
IG (उत्तरी रेंज) हिमांशु लाल ने कहा,
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा एक संयुक्त जाँच दल के माध्यम से सत्यापन प्रक्रिया सावधानीपूर्वक की जा रही है, जिसमें कई स्तरों पर जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी भारतीय नागरिक को गलत तरीके से हिरासत में न लिया जाए या परेशान न किया जाए.” प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखते हुए भारतीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है… जो लोग वैध दस्तावेज़ पेश कर रहे हैं उन्हें घर लौटने की अनुमति दी जा रही है.
IG हिमांशु लाल ने कहा, “यह प्रक्रिया किसी समुदाय या क्षेत्र को टारगेट करने के लिए नहीं है, बल्कि कानून के शासन को बनाए रखने और हमारे राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है. यह राष्ट्रीय हित और सुरक्षा की रक्षा के लिए है, जिससे समझौता नहीं किया जा सकता.”
ओडिशा पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों को भोजन, पानी, स्वच्छता और मेडिकल की सुविधा वाले सेंटरों में रखा जा रहा है.
नागरिकता का प्रमाण नहीं दिखा पा रहे लोगों का पता लगाएं
ओडिशा की भाजपा सरकार ने सभी जिलों से जो लोग नागरिकता का प्रमाण नहीं दिखा पा रहे हैं उनका पता लगाने, उनकी पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने के लिए डिटेंशन सेंटरों की पहचान करने को भी कहा है. पश्चिम बंगाल सरकार के सूत्रों ने कहा कि झारसुगुड़ा में पुलिस ने 7 जुलाई की तड़के उन कॉलोनियों और बस्तियों में छापेमारी की जहां बंगाली प्रवासी मजदूर रहते हैं.
झारसुगुड़ा की प्रवासी कॉलोनी में रहने वाले और प्लास्टिक का सामान बेचने वाले कबीर शेख ने कहा, “पुलिस आई और उन्हें ले गई. कई लोगों को हिरासत में लिया गया. उन्हें स्थानीय पुलिस स्टेशन ले जाया गया. पश्चिम बंगाल में निवास प्रमाण जैसे दस्तावेज़ देने के बावजूद, पुलिस नहीं मानी और उन्हें डिटेंशन सेंटरों में भेज दिया.”
मुर्शिदाबाद के रहने वाले कबीर शेख ने कहा कि वह किस्मत वाले थे क्योंकि इस अभियान के दौरान वह कॉलोनी से बाहर थे.
मुख्य सचिव ने पत्र लिखकर उत्पीड़न रोकने की मांग की
पिछले सप्ताह बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत ने बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों की हिरासत पर ओडिशा के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा मनोज पंत ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि बंगाल के लोगों के साथ हो रहे उत्पीड़न को रोकने की मांग की.
मुख्य सचिव मनोज पंत ने लिखा, “इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि जब ये लोग वैध पहचान पत्र दिखाते भी हैं… तो कई मामलों में उनसे कई पीढ़ियों पुराने पैतृक ज़मीन के रिकॉर्ड दिखाने को कहा जा रहा है, जो प्रवासी मजदूरों के लिए एक अनुचित मांग है.”
ओडिशा से पहले यह अभियान गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और मध्य प्रदेश जैसे सभी भाजपा शासित राज्यों में चलाया गया.
-भारत एक्सप्रेस
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