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अब मध्य प्रदेश में क्यों होने लगा वोटर लिस्ट पर बवाल?

Madhya Pradesh News: बिहार में वोटर लिस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. हालांकि, अब ये विवाद मध्य प्रदेश पहुंच गया है. आइये जानें एमपी में वोटर लिस्ट को लेकर बवाल क्यों हो रहा है?

Politics Over Voter List In Madhya Pradesh

मध्य प्रदेश में वोटर लिस्ट पर बवाल

Madhya Pradesh News: बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले चुनाव आयोग आखिरी मतदाता सूची तैयार करने के लिए जुट गया है. इसे लेकर आपत्ति भी आई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. हालांकि, अदालत के फैसले के बाद मामला थोड़ा शांत हो गया है. अब इस बीच खबर आ रही है कि मध्य प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर बवाल होने लगा है और प्रदेश की सियासत गरमा गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं सरकार की ओर से मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार किया है.

क्या है मामला?

स्थानीय निकायों में उपचुनाव को लेकर मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारी के चलते मतदाता सूची का MPSEDC के सॉफ्टवेयर से मिलन किया तो मतदाता सूची में कई जानकारियां सामने आई हैं. इसमें कई जिलों में एक ही पते पर बड़ी संख्या मतदाता रजिस्टर्ड मिले हैं. आयोग ने इसे संदिग्ध मानकर उसकी जांच के लिए सभी कलेक्टरों और निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया. उन घरों का भौतिक सत्यापन कराएं जहां 11 या उससे अधिक मतदाता दर्ज हैं.

सियासत हुई शुरू

अब राज्य निर्वाचन के निर्देश और उसकी कार्यवाही सामने आते ही वोटर लिस्ट (Madhya Pradesh Voter List) को लेकर सियासत शुरू हो गई. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर चुनाव को खरीदने, बेचने और मैनिपुलेट करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि इसी वजह से मध्य प्रदेश में लोकतंत्र खतरे में है और पूरी वोटर लिस्ट का सत्यापन जरूरी है. वहीं कमलनाथ ने भी इस मामले ट्वीट करके मतदाता सूची पर सवाल खड़े किए हैं.

विश्वास सारंग ने किया पलटवार

पूरे मामले में कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर सरकार की तरफ से भी पलटवार हुआ है. मोहन यादव सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस जब हारती है तो आरोप लगाती है. यह चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर दबाव बनाने का काम है. उनके लिए जीतने पर सब अच्छा होता है. अगर वो हार जाएं तो सब खराब नजर आता है.

जानें निर्वाचन आयोग का नजरिया

इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग के सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि 2027 में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव (Madhya Pradesh Nikay Chunav 2027 ) को लेकर मतदाता सूची की तैयारी चल रही है. अभी इसे फर्जी वोटर लिस्ट कहना सही नहीं है. हमने सभी जिलों के कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारियों, नगर पालिकाओं और पंचायतों अधिकारियों को जांच करने के आदेश दिए हैं. उन्हें कहा गया है कि जहां-जहां एक ही पते पर 11 या उससे अधिक मतदाता दर्ज हैं वहां जाकर भौतिक सत्यापन करें.

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अभिषेक सिंह ने बताया कि हमने यह डाटा जिलों को जांच के लिए भेजा है. भौतिक सत्यापन के बाद ही कोई उचित कार्रवाई की जाएगी. राज्य निर्वाचन आयोग ने जिलों के कलेक्टरों को स्पष्ट किया है कि जिन पते पर जरूरत से ज्यादा मतदाता दर्ज हैं उनकी फील्ड वेरिफिकेशन कराई जाए. जांच के बाद यदि फर्जी नाम पाए गए तो उन्हें सूची से डिलीट कर दिया जाए. अब यह प्रक्रिया निरंतर चलेगी. क्योंकि अभी चुनाव में समय है.

उठते रहते हैं सवाल

मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर यह कोई पहला मौका नहीं है. हर चुनाव में मतदाता सूची को लेकर जब भी मतदाता घटते हैं या बढ़ते हैं तब तब विपक्ष द्वारा सवाल उठाए जाते है. आयोग भी चुनाव से पहले मतदाता सूची के शुद्धिकरण करने का दावा भी करता है. चूंकि बिहार में मतदाता सूची को लेकर बबाल मचा हुआ है. ऐसे में मध्य प्रदेश में भी नेता निर्वाचन आयोग के नियमित काम पर सियासी बयानबाजी कर रहे हैं. हालांकि, सच क्या है यह भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो जाएगा.

भोपाल से अजय भटनागर की रिपोर्ट



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