सांकेतिक फोटो (सोशल मीडिया)
Noida News: आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की याचिका पर कहा कि क्या हमें इन बड़े दिल वाले लोगों के लिए हर गली, हर सड़क खुली छोड़ देनी चाहिए? इन जानवरों के लिए तो पूरी जगह है, लेकिन इंसानों के लिए कोई जगह नहीं है. आप उन्हें अपने घर में खाना क्यों नहीं देते? कोर्ट ने कहा कि आपको कोई रोक नहीं रहा है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह टिप्पणी की है.
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की थी याचिका
कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि क्या सिर्फ इसलिए कि कुछ लोग जानवरों को खाना खिलाना चाहते हैं, सड़कों पर इंसानों के लिए जगह कम कर दी जाए?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा ऐसा
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि नोएडा अथॉरिटी ऐसा नहीं कर रही है, जबकि ग्रेटर नोएडा में ऐसा हो रहा है. मतलब नियमों के अनुसार कुत्तों को खाना खिलाने की जगह तय करना सरकार का काम है, लेकिन नोएडा में ऐसा नहीं हो रहा है.
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हाईकोर्ट ने मार्च में 2025 इसको लेकर आदेश दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता पशु जन्म नियंत्रण नियमों के अनुसार सड़कों पर रहने वाले कुत्तों को भोजन देने में असमर्थ है.
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी कहा कि उनका मुवक्किल एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स 2023 का पालन कर रहा है. नियम 20 के अनुसार स्थानीय निवासियों की संख्या या नगरपालिका को सामुदायिक जानवरों के लिए भोजन स्थल निर्धारित करने की जिम्मेदारी है.
याचिकाकर्ता के वकील ने नियमों के अनुपालन का दावा किया है, और कहा- नगर प्राधिकरण ग्रेटर नोएडा में तो ऐसे स्थान बना रहा है, लेकिन नोएडा में नहीं. उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों पर भोजन केंद्र बनाया जा सकता है, जहां लोग अक्सर नहीं आते हैं.
पहले से लंबित याचिका के साथ संलग्न की ये याचिका
कोर्ट ने पूछा कि आप सुबह साइकिल चलाने जाते हैं? ऐसा करके देखिए क्या होता है. वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जब वह सुबह साइकिल से सैर करने जाते हैं और कई कुत्तों को देखते हैं. जिस पर कोर्ट ने कहा कि सुबह की सैर करने वालों को भी खतरा है. इसके साथ ही कोर्ट ने पहले से लंबित याचिका के साथ इस याचिका को भी संलग्न कर दिया.
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