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फिल्मों से संन्यास तक… ममता कुलकर्णी बनीं साध्वी ममता नंदगिरी, बोलीं- ‘आध्यात्म ही जीवन का सत्य है’

Mamta Kulkarni: बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने फिल्मों को अलविदा कहकर 25 साल की तपस्या के बाद अध्यात्म का मार्ग चुना. महामंडलेश्वर बनने के बाद उठे विवादों के चलते उन्होंने पद छोड़ दिया, लेकिन सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में जुटी हैं.

mamta kulkarni

Mamta Kulkarni: बॉलीवुड की ग्लैमरस दुनिया को अलविदा कह चुकीं एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह है उनका आध्यात्म की राह पर लिया एक बड़ा फैसला. हाल ही में प्रयागराज महाकुंभ में पिंडदान करने के बाद ममता को किन्नर अखाड़े की ओर से महामंडलेश्वर की उपाधि से नवाजा गया था. मगर यह नियुक्ति विवादों में घिर गई और उन्होंने इस पद से इस्तीफा भी दे दिया था.

25 साल की तपस्या के बाद अध्यात्म का मार्ग चुना

अब अपने हालिया इंटरव्यू में ममता कुलकर्णी उर्फ ममता नंदगिरी ने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से तपस्या, ब्रह्मचर्य और ध्यान की साधना में लीन हैं. उन्होंने कहा, ‘अभिनय की दुनिया एक भौतिक जीवन था, लेकिन सच्चा सुख और ज्ञान तो अध्यात्म में है. मैं अब उस मार्ग पर हूं जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है.’

उन्होंने साफ कहा कि ब्रह्म विद्या का ज्ञान केवल किताबें पढ़कर नहीं आता, बल्कि उसके लिए ध्यान, धारणा और अंतर्मन की साधना जरूरी है. उनके अनुसार, “अगर आप सिर्फ वेद-पुराण कंठस्थ करके खुद को ज्ञानी समझ लें, तो यह एक तरह से अध्यात्म का ‘फैंसी ड्रेस कॉम्पिटिशन’ हो जाता है. असली ब्राह्मण वही है जो तुरीयावस्था तक पहुंच चुका हो.”

महामंडलेश्वर पद को लेकर बोले- सनातन धर्म का हो प्रचार-प्रसार

हाल ही में हरियाणा में आयोजित एक धार्मिक आयोजन में शामिल होकर ममता नंदगिरी ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे सनातन धर्म की सेवा कर रही हैं. उन्होंने आगे कहा. ‘मैं चाहती हूं कि जितना हो सके, लोग इस धर्म से जुड़ें. सनातन धर्म का विस्तार ही मेरा उद्देश्य है,’

हालांकि, महामंडलेश्वर बनाए जाने पर उठे सवालों के चलते उन्होंने खुद ही पद से इस्तीफा दे दिया. लेकिन उनका कहना है कि वे आगे भी अध्यात्म के कार्यों में जुड़ी रहेंगी और धर्म का प्रचार करती रहेंगी.

फिल्मों से अध्यात्म तक का सफर

90 के दशक में ममता कुलकर्णी ने ‘करण अर्जुन’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘बाजी’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया था. लेकिन अचानक उन्होंने बॉलीवुड से दूरी बना ली और गुमनामी की जिंदगी जीने लगीं. अब वे पूर्णतः अध्यात्म के मार्ग पर हैं और ‘ममता नंदगिरी’ के रूप में साध्वी जीवन जी रही हैं.

अंत में क्या कहा ममता ने?

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने लोगों से अपील की, ‘आज जब दुनिया भौतिकता में उलझी है, तब हर किसी को अपने भीतर झांकने की जरूरत है. अध्यात्म ही जीवन का सत्य है और उसी से समाज और राष्ट्र की उन्नति संभव है. सनातन धर्म को मजबूत करने के लिए हमें एकजुट होना होगा.’

ममता कुलकर्णी का ये रूप उनके चाहने वालों के लिए भले ही चौंकाने वाला हो, लेकिन उनका विश्वास, समर्पण और साधना स्पष्ट रूप से दिखाता है कि वे अब अभिनय नहीं, अध्यात्म की दुनिया की नायिका बन चुकी हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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