Love-Jihad News: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा धर्मनान्तरण और लव जिहाद के खिलाफ बनाये गए कानून के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने पहले से लंबित याचिका के साथ टैग कर दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप.मेहता की बेंच ने यह नोटिस जारी किया है. यह याचिका लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ता रूपरेखा वर्मा ने दायर की है.
दायर याचिका में कहा गया है कि लव जिहाद और धर्मनान्तरण के खिलाफ लाए गए कानून को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का हनन है. याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), अनुच्छेद 19 (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है.
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
उन्होंने यह भी कहा है कि अधिनियम की धारा 2 और 3 अस्पष्ट है. इसमें यह तय करना कठिन है कि अपराध क्या है. यूपी धर्मनान्तरण संशोधन कानून भेदभावपूर्ण है. इस कानून में प्रशासन की ओर से दुरुपयोग रोकने का कोई प्रावधान नहीं है. अगर किसी निर्दोष नागरिक को इस मामले में फंसाया जाता है तो उसे रोकने का कोई प्रावधान इस कानून में नहीं है.
इससे पहले दायर याचिका में 2024 का संशोधन प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को शामिल किए बिना शिकायत दर्ज करने के लिए अधिकृत व्यक्तियों की श्रेणी का विस्तार करता है. इसमें कहा गया है कि कानून सभी धर्म परिवर्तन के पीछे दुर्भावना मानता है और वयस्क व्यक्तियों को संदेह की दृष्टि से देखता है, जिससे वे ऐसे विषय बन जाते हैं जिनके व्यक्तिगत निर्णयों को राज्य द्वारा मान्य किया जाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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