Bharat Express DD Free Dish

दिल्ली हाईकोर्ट ने आपराधिक अदालतों में अभियोजकों की तदर्थ नियुक्तियों के लिए दिल्ली सरकार को ठोस कदम उठाने का दिए आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि अभियोजन निदेशालय में रिक्त पदों को भरने के लिए चार सप्ताह में तदर्थ नियुक्तियों की व्यवस्था की जाए. कोर्ट ने स्पष्ट रोडमैप और नई नियुक्तियों की प्रक्रिया तेजी से पूरी करने को कहा.

Delhi-High-Court

दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह नियमित भर्ती होने तक आपराधिक अदालतों में अतिरिक्त लोक अभियोजकों या सहायक लोक अभियोजकों के पदों पर तदर्थ नियुक्तियां करने के लिए ठोस कदम उठाए. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं जस्टिस अनीश दयाल की पीठ ने सरकार से कहा कि वह चार सप्ताह के भीतर सीधी भर्ती के जरिए या तदर्थ पदोन्नति के माध्यम से तदर्थ नियुक्ति की वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए वह कदम उठाए.

अदालत ने सरकार से यह भी कहा कि वह नया हलफनामा दाखिल कर अभियोजन निदेशालय में अभियोजकों के पूरे संवर्ग में रिक्तियों को भरने के लिए स्पष्ट रोडमैप बताए. कोर्ट 12 सितंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. साथ ही विास व्यक्त किया कि सरकार के 5 जनवरी, 2024 के कार्यालय ज्ञापन और भर्ती नियमों में संशोधन से संबंधित प्रक्रिया इस अवधि के भीतर पूरी हो जाएगी.

लंबित संशोधन प्रक्रिया जल्द पूरी करने पर जोर

कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह तदर्थ नियुक्तियां उस तरह से करे जिससे अदालतें सुचारू रूप से काम कर सके और सभी अदालतों के लिए एक-एक लोक अभियोजक उपलब्ध हो सके. कोर्ट ने यह निर्देश वर्ष 2009 में दर्ज एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए दिया. उसमें मुद्दा उठाया गया था कि बिना किसी सुनवाई के आरोपी 5 से 12 साल तक जेल में कैद हैं. उसने इस दौरान सरकार के एक हलफनामे का अवलोकन किया जिसमें कहा गया था कि अभियोजन निदेशालय में कैडर पुनर्गठन के बाद अतिरिक्त लोक अभियोजक के 210 पद व सहायक लोक अभियोजक के 265 पद सृजित किए गए हैं.

इसके अलावा वह नियमित भर्ती या नियुक्ति लंबित रहने तक सहायक लोक अभियोजक की संविदा नियुक्ति तथा अतिरिक्त लोक अभियोजक की तदर्थ पदोन्नति जैसे अन्य विकल्पों पर काम कर रही है. पीठ ने पाया कि हलफनामे में उन पदों या रिक्तियों को भरने के लिए सरकार के उठाए गए या उठाए जा सकने वाले कदमों के बारे में कुछ नहीं बताया गया है, जिनके लिए भर्ती नियमों में संशोधन की आवश्यकता नहीं है.

ये भी पढ़ें: आपराधिक मानहानि केस में लिपिका मित्रा पर जुर्माना, निर्मला सीतारमण के खिलाफ मुकदमा दर्ज

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read