दिल्ली हाई कोर्ट
दिल्ली के द्वारका कोर्ट ने अवमानना के मामले में कोर्ट का ने एक अनोखी सजा सुनाई है. कोर्ट ने अदालत का समय बर्बाद करने पर अवमानना के दोषी चार लोगों को पूरे दिन हाथ ऊपर उठाकर खड़े रहने का निर्देश दिया है. चारों पर आरोप है कि उन्होंने कोर्ट के आदेश के बावजूद समय पर जमानती बॉन्ड नही भरा, जिसके चलते कोर्ट का समय बर्बाद हुआ.
द्वारका कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ गोयल ने वर्ष 2018 के एक आपराधिक मामले के दोषियों से कि उन्हें अदालत का दैनिक कामकाज समाप्त होने तक हाथ ऊपर करके खड़े रहने का निर्देश दिया जाता है. कोर्ट 11 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. वे दोषी कुलदीप, राकेश, उपासना और आनंद नाम के व्यक्ति हैं.
उन्हें अदालती कार्यवाही की अवमानना का दोषी ठहराया गया और आईपीसी की धारा 228 (न्यायिक कार्यवाही में लगे किसी लोक सेवक का जानबूझकर अपमान करना या उसके काम में बाधा डालना) के तहत दोषी ठहराया गया है.
मामला 2018 की संपत्ति विवाद से जुड़ा
अदालत ने 6 मई को आरोपियों से 15 जुलाई तक अपने ज़मानत बांड जमा करने का निर्देश दिया गया था, ऐसा न करने पर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. 15 जुलाई को जब मामले की सुनवाई पूर्व साक्ष्य के लिए निर्धारित की गई, तो अदालत ने पाया कि दो बार प्रतीक्षा करने और मामले की सुनवाई बुलाने के बावजूद आरोपियों ने ज़मानत बांड जमा नहीं किए.
यह घटनाक्रम 2018 में हरकेश जैन की आरोपी अनिल, राम कुमार, आनंद, कुलदीप, राकेश और उपासना सेहरावत के खिलाफ दाखिल एक शिकायत मामले में हुआ. वैसे मुकदमा लंबित रहने के दौरान दो आरोपी राम कुमार व अनिल की मौत हो चुकी है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि मार्च 2018 में आरोपियों ने उसकी संपत्ति हड़पने की कोशिश की और उस पर अतिक्रमण कर एक अवैध निर्माण कर दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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