Bharat Express DD Free Dish

कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ चलेगा महाभियोग, संसद में प्रस्ताव को 200 से ज्‍यादा सांसदों ने किया समर्थन

Corruption Allegations Against Justice Varma: कैश कांड के आरोपों से घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया, जिसे 207 सांसदों का समर्थन मिला. जांच कमेटी ने वर्मा को कैश कांड में दोषी माना.

Justice Yashwant Varma
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Justice Yashwant Varma Impeachment Proceedings: संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 21 जुलाई 2025 को, इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Varma) के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही (Impeachment Proceedings) शुरू हो गई है. यह कार्रवाई उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास में मार्च 2025 में आग लगने की घटना के बाद मिले भारी मात्रा में जले हुए नोटों के मामले में हुई. इस घटना ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर व्यापक विवाद खड़ा किया. 145 लोकसभा और 63 राज्यसभा सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें राहुल गांधी, अनुराग ठाकुर, रविशंकर प्रसाद, सुप्रिया सुले और केसी वेणुगोपाल जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं.

तीन सदस्यीय जांच कमेटी की सिफारिश

तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने इस मामले की जांच के लिए मार्च 2022 में एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी, जिसमें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और कर्नाटक हाई कोर्ट की जज अनु शिवरामन शामिल थे. कमेटी ने अपनी 64 पेज की रिपोर्ट में कहा कि जले हुए नोटों का ढेर जस्टिस वर्मा (Justice Yashwant Varma) के आवास के स्टोररूम में मिला, जिस पर उनका या उनके परिवार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था. जस्टिस वर्मा इस राशि के स्रोत के बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके.

जस्टिस वर्मा ने सिरे से खारिज किए आरोप

जस्टिस वर्मा (Justice Yashwant Varma) ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ साजिश बताया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जांच कमेटी की सिफारिशों को चुनौती दी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें उचित जवाब देने का मौका नहीं दिया गया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया.

यह भी पढ़िए: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से किया इनकार

महाभियोग की प्रक्रिया के लिए ये होना जरूरी

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत, किसी जज को हटाने के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है. प्रस्ताव को लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों का समर्थन चाहिए. इस मामले में 207 सांसदों का समर्थन इसे ऐतिहासिक बनाता है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सभी दलों का समर्थन इस प्रस्ताव को मजबूत करता है.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read