सुप्रीम कोर्ट.
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के सिटिंग जज मौसमी भट्टाचार्य के खिलाफ अपमानजनक आरोप लगाने वाले वकील को अवमानना नोटिस जारी कर 11 अगस्त तक जवाब मांगा है. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि हम हम न्यायाधीशों को एक घेरे में रखकर किसी भी वादी को जस्टिस के खिलाफ ऐसे आरोप लगाने की अनुमति नही दे सकते.
कोर्ट ने पेड्डी राजू, वकील रितेश पाटिल और एओआर को यह अवमानना नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए. वकीलों की नाराजगी इस बात पर है कि ठीक से अंग्रेजी नहीं बोल पाने जैसे मुद्दों पर वकीलों का अपमान करती है. इसके अलावे वकीलों पर जज द्वारा भारी जुर्माना लगाने से भी वकील नाराज है. सीजेआई बी आर गवई ने कहा कि न केवल वादी, बल्कि हस्ताक्षर करने वाला वकील भी न्यायलय की अवमानना का दोषी है.
अपमानजनक व्यवहार और भारी जुर्माना लगाने के आरोप
बता दें कि कुछ दिनों से जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य के खिलाफ वकील लगातार आवाज उठा रहे है. टीएचसीएए के अध्यक्ष ए. जगन ने कहा कि जस्टिस वकीलों को अपनी दलीलें रखने के लिए पर्याप्त समय नही देती है. उन्होंने कहा कि जस्टिस मुवक्किलों की राय लिए बिना ही रजिस्ट्री को निर्देश दे रही थी. जस्टिस भट्टाचार्य की ट्रांसफर को लेकर वकील भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और राष्ट्रपति को पत्र लिखने पर विचार कर रहे है.
जस्टिस भट्टाचार्य को साल 2017 में कोलकाता हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था. फरवरी में उन्होंने ट्रांसफर की मांग. जिनकी मांग पर मार्च 2024 में तेलंगाना हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया. जस्टिस भट्टाचार्य आपराधिक अपीलों, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका और पारिवारिक एवं वाणिज्यिक अदालतों से संबंधित मामले की सुनवाई करती हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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