सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से भेजे गए संदर्भ पर सुनवाई के रूप रेखा तय कर दी है. सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि शुरुआत में हम प्रारंभिक आपत्ति पर पक्षों की एक घंटे तक सुनवाई करेंगे. उसके बाद हम 19 अगस्त, 20 अगस्त, 21 अगस्त और अगस्त 26 अगस्त को अटॉर्नी जनरल और केंद्र सरकार के प्रेसिडेंशियल रेफरेंस का समर्थन करने वाले पक्षों अपनी दलील रखेंगे.
सीजेआई ने क्या कहा?
जबकि प्रेसिडेंशियल रेफरेंस का विरोध करने वाले पक्षों को 25 अगस्त, दो सितंबर, 3 सितंबर और 9 सितंबर को अपना पक्ष रखेंगे. सीजेआई ने कहा कि यदि कोई प्रत्युत्तर होगा तो उस पर10 सितंबर को सुनवाई होगी. साथ ही संविधान पीठ ने मामले में दायर हस्तक्षेप याचिका को भी अनुमति दे दी है. संविधान पीठ में सीजेआई बी आर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर शामिल है.
सुनवाई किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाएगा बदलाव
सीजेआई ने कहा कि सुनवाई किसी भी परिस्थिति में बदलाव नहीं किया जाएगा. मामले की सुनवाई के दौरान केरल सरकार की ओर से पेश पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ वकील के के वेणुगोपाल और तमिलनाडु सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी की ओर से प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर प्रारंभिक स्वीकार्यता संबंधी आपत्तियों पर एक घंटे तक सुनवाई करेगी. कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से अमन मेहता और रेफरेंस का विरोध करने वालों के लिए मीसा रोहतगी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है.
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से किया आग्रह
बता दें कि तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 13 मई के प्रेसिडेंशियल रेफरेंस को अनुपालन योग्य नहीं बताते हुए उसे वापस करने का आग्रह किया है. साथ ही इसे राज्यपाल की शक्तियों पर स्थापित संवैधानिक कानून को फिर से खोलने का प्रयास बताया है. पंजाब बनाम राज्यपाल के प्रधान सचिव (2024) तेलंगाना और तमिलनाडु के फैसलों का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने तर्क दिया है कि अनुच्छेद 143 (1) के तहत कोई नया कानून का महत्वपूर्ण प्रश्न नहीं उठता है. जिससे यह रेफरेंस एक छिपी हुई अपील बन जाता है और इसे अनुत्तरित वापस कर दिया जाना चाहिए.
इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान केरल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के के वेणुगोपाल ने राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए संदर्भ पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह मुद्दा सुनवाई योग्य नही है. वही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि आज यह मुद्दा उठाना जल्दबाजी होगी. इसपर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी सहमति जताई.
राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए संदर्भ की योग्यता पर उठाया सवाल
तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वकील ने भी राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए संदर्भ की योग्यता पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि हम सीधे प्रभावित होने वाले पक्ष है. लिहाजा यह सुनवाई योग्य नही है. राष्ट्रपति ने फैसलों के संवैधानिक मूल्यों और व्यवस्थाओं के विपरीत बताया और इसे संवैधानिक सीमाओं का अतिक्रमण करार दिया है. संविधान के अनुच्छेद 143 (1) के तहत राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से 14 संवैधानिक सवालों पर राय मांगी है.
-भारत एक्सप्रेस
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