Allahabad High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जब तक फ्रॉड साबित न हो जाए, किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने सहायक अध्यापक नवतेज कुमार सिंह की बर्खास्तगी को रद करते हुए तत्काल बहाली का आदेश दिया है. यह मामला स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र से जुड़ा था, जिसमें विभागीय गलती को आधार बनाते हुए याची को राहत दी गई.
विभागीय गलती के लिए शिक्षक को दंडित नहीं
कोर्ट ने कहा कि यदि कोई प्रमाणपत्र विभागीय त्रुटि से जारी हो और लाभार्थी की इसमें कोई भूमिका न हो, तो इसे अनियमितता माना जाएगा, न कि फ्रॉड. मामले में नवतेज कुमार सिंह, जिनके पितामह स्वतंत्रता सेनानी थे, को 16 साल की उम्र में पहला आश्रित प्रमाणपत्र जारी हुआ था, जो रजिस्टर में दर्ज नहीं था. बाद में 31 साल की उम्र में दूसरा प्रमाणपत्र जारी होने पर उन्हें दोहरे प्रमाणपत्र और फ्रॉड के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था. न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की बेंच ने कहा कि प्रमाणपत्र जारी कराने में याची का कोई रोल नहीं था और फ्रॉड साबित नहीं हुआ.
स्वतंत्रता सेनानी आश्रित का अधिकार सुरक्षित
नवतेज 2021 की सहायक अध्यापक भर्ती में फ्रीडम फाइटर आश्रित कोटे से चयनित हुए थे और जूनियर बेसिक स्कूल, यादव बस्ती, बलिया में नियुक्त हुए. दस्तावेज सत्यापन में पाया गया कि उनके प्रमाणपत्र क्रमांक 1114 पर जिलाधिकारी कार्यालय के रजिस्टर में दूसरे व्यक्ति हरमीत सिंह का नाम दर्ज था. कोर्ट ने माना कि याची निर्विवाद रूप से स्वतंत्रता सेनानी आश्रित हैं और 1 अप्रैल 2021 को प्रमाणपत्र पेश किया था. क्रमांक पर नाम न दर्ज होना लिपिकीय गलती है, जिसके लिए उन्हें फ्रॉड का दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
हाईकोर्ट ने दिया तत्काल बहाली का आदेश
कोर्ट ने याची की याचिका स्वीकार करते हुए बर्खास्तगी आदेश को रद कर दिया और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बलिया को तत्काल नवतेज की सहायक अध्यापक पद पर बहाल करने का निर्देश दिया. यह फैसला विभागीय त्रुटियों के लिए शिक्षकों को सजा न दिए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
ये भी पढ़े: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वदेशी पहल का संकल्प: विश्व की आर्थिक उथल-पुथल में राह बनाना
भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
