बिहार के बाद अब पश्चिम बंगाल (West Bengal) में भी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू होने जा रहा है. चुनाव आयोग ने 8 अगस्त को राज्य सरकार को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी थी. 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के वकील गोपाल शंकर नारायण ने बताया कि आयोग ने बिना राज्य सरकार से चर्चा किए ही SIR शुरू करने की तैयारी कर ली है.
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि बंगाल में अभी SIR शुरू नहीं हुआ है. इस पर राज्य के वकील ने आयोग के पत्र का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि बिना बातचीत के ऐसी प्रक्रिया कैसे शुरू की जा सकती है. वहीं, वकील कल्याण बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने विरोध प्रदर्शन में एक महिला को आग लगाने की कोशिश का जिक्र किया लेकिन कोर्ट ने कहा कि बंगाल के मुद्दे पर बाद में विस्तार से सुनवाई की जाएगी.
BLO को ट्रेनिंग
सूत्रों के मुताबिक, बंगाल में बीएलओ (BLO) को ट्रेनिंग दिया जा चुका है और 2002 की मतदाता सूची भी आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई है. राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने 7 अगस्त को आयोग को बताया कि राज्य SIR के लिए तैयार है और सभी जिलों से जानकारी लेकर रिपोर्ट भी भेज दी गई है.
ममता बनर्जी ने जताया विरोध
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर राज्य की सरकार पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने विरोध जताया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने SIR को एनआरसी लागू करने की कोशिश बताया है और लोगों से अपील की है कि वे कोई भी फॉर्म न भरें. TMC ने इसके खिलाफ आंदोलन भी शुरू कर दिया है.
बंगाल में SIR को लेकर सियासी माहौल गर्म है. एक तरफ चुनाव आयोग इसे जरूरी प्रक्रिया बता रहा है वहीं दूसरी ओर ममता सरकार इसे जनविरोधी कदम मान रही है. अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या फैसला देता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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