Supreme Court: सात बार से सांसद रहे मोहन डेलकर आत्महत्या मामले के 9 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. डेलकर के बेटे ने याचिका दायर कर हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. सीजेआई बी. आर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ ने यह फैसला सुनाया है.
9 लोगों के खिलाफ दर्ज FIR को हाई कोर्ट ने किया था रद्द
हाल ही में कोर्ट ने दिवंगत सांसद के बेटे अभिनव डेलकर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा, राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. केंद्र शासित प्रदेश दादर एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल सहित 9 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को हाई कोर्ट ने 8 सितंबर 2022 को रद्द कर दिया था.
आरोपियों की ओर से पेश वकील ने क्या कहा?
आरोपियों की ओर से पेश वकील ने कहा था कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है. यह प्राथमिकी दादरा एवं नगर हवेली से सात बार सांसद रह चुके डेलकर की मौत के बाद दर्ज की गई थी, जो 2021 में मुंबई के एक होटल में मृत पाए गए थे.
मुंबई पुलिस ने आपराधिक धमकी देने के आरोप में दर्ज किया था केस
इस मामले में मुंबई पुलिस ने मार्च 2021 में केंद्र शासित प्रदेश दादर नगर हवेली और दमन एवं दीव के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल, तत्कालीन जिलाधिकारी संदीप सिंह, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शरद दराडे, तत्कालीन उपजिलाधिकारी अपूर्व शर्मा, अनुमंडल अधिकारी मनस्वी जैन, पुलिस निरीक्षक मनोज पटेल, रोहित यादव, राजनीतिक नेता फतेह सिंह चौहान और दिलीप पटेल के खिलाफ कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने और डेलकर को आपराधिक धमकी देने के आरोप में केस दर्ज किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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