Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट सेक्टर में जबरदस्त बूम! पहली छमाही में लीज पर लिया गया 9 मिलियन वर्ग फुट स्पेस

industrial Real Estate: JLL इंडिया के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस साल जनवरी से जून तक की पहली छमाही (H1) के बीच मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने 9.0 मिलियन वर्ग फुट स्पेस लीज पर लिया है. जो कि 2024 के आंकड़ों से 38% ज्यादा है.

industrial Real Estate

भारत के इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स (I&L) रियल एस्टेट मार्केट में 2025 की पहली छमाही में बड़ा रिकॉर्ड बना है. JLL इंडिया के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस साल जनवरी से जून तक की पहली छमाही (H1) के बीच मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने 9.0 मिलियन वर्ग फुट स्पेस लीज पर लिया है. जो कि 2024 की पहली छमाही के मुकाबले 38% ज्यादा है.

2019 के मुकाबले 6 गुना बढ़ोतरी

अगर 2025 की पहली छमाही की तुलना 2019 की पहली छमाही से करें तो यह आंकड़ा बहुत बड़ा आता है. 2019 में जहां मैन्युफैक्चरिंग लीजिंग बस 1.6 मिलियन वर्ग फुट थी. वहीं 2025 में यह बढ़कर 9 मिलियन वर्ग फुट तक जा पहुंचा है. यानी मात्र 6 सालों में मैन्युफैक्चरिंग लींजिंग में 6 गुना की बढ़ोतरी हुई है.

कोविड महामारी के बाद सप्लाई चेन की प्राथमिकताओं में बदलाव हुआ था. जिसके बाद कंपनियों ने जमीन खरीदने के बजाय ग्रेड-ए और बिल्ट-टू-सूट स्पेस किराये पर लेना शुरू कर दिया था. जमीन पर लीज लेना मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को तेजी से काम शुरू करने की सुविधा देता है.

ग्रेड-A इंफ्रास्ट्रक्चर का है दबदबा

इस बदलाव का ग्रेड-ए इंफ्रास्ट्रक्चर नेतृत्व कर रहा है. देश के कुल 463.2 मिलियन वर्ग फुट I&L स्टॉक में से ग्रेड-ए इंफ्रास्ट्रक्चर के पास 55% हिस्सा है. जो आठ बड़े शहरों मुंबई, दिल्ली एनसीआर, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद में फैला हुआ है.

H1 2025 में कुल नेट एब्जॉर्प्शन 24.6 मिलियन वर्ग फुट रहा, जिसमें 81% हिस्सेदारी ग्रेड A स्पेस की रही. साल 2025 के अंत तक कुल एब्जॉर्प्शन 55–57 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2024 के 50 मिलियन वर्ग फुट से 12–15% ज्यादा होगा.

JLL इंडिया के हेड (इंडस्ट्रियल एंड लॉजिस्टिक्स) योगेश शेवड़े ने कहा कि,

भारत का इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट बाजार एक मौलिक संरचनात्मक बदलाव का अनुभव कर रहा है, जिसका सबूत है कि H1 2025 में सभी लेन-देन में मैन्युफैक्चरिंग लीज का हिस्सा 24% है। साल के अंत तक एब्जॉर्प्शन 55–57 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंचने का अनुमान है — जो 2024 के 50 मिलियन वर्ग फुट से उल्लेखनीय वृद्धि है. हम मैन्युफैक्चरिंग निवेश में वृद्धि के ठोस असर को देख रहे हैं.

ये शहर बने हॉटस्पॉट

योगेश शेवड़े के मुताबिक बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई और मुंबई इन पांच शहरों में ही भारत की कुल नेट डिमांड का 90% हिस्सा है. जिसमें सबसे आगे बेंगलुरु रहा है. उसके बाद पुणे, दिल्ली एनसीआर, चेन्नई और मुंबई का स्थान रहा. ये पांचों बाजार मिलकर देश के कुल एब्जॉर्प्शन, का 90% हिस्सा रखते हैं.

किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा डिमांड?

लीजिंग डील्स में 3PL/लॉजिस्टिक्स कंपनियों का हिस्सा 28% रहा, जबकि लाइट मैन्युफैक्चरिंग 24% पर रही. ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और व्हाइट गुड्स सेक्टर सबसे एक्टिव रहे.

ये भी पढ़ें- सेमीकंडक्टर सेक्टर में ECMS निभा सकता है महत्वपूर्ण भूमिका, डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन में 20% का होगा इजाफा

बिल्ट-टू-सूट स्पेस की बढ़ रही मांग

बिल्ट-टू-सूट मॉडल भी तेजी पकड़ रहा है. ऐसे स्पेस पर किराया आम वेयरहाउसिंग से 20–25% ज्यादा मिल रहा है क्योंकि इसमें टेनेंट-फ्रेंडली मॉडिफिकेशन शामिल होते हैं. पुणे और चेन्नई इस मामले में आगे हैं, क्योंकि वहां इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और ग्रेड A स्टॉक दोनों ही मजबूत हैं.

– भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital