दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय द्वारा दिल्ली से बाहर शैक्षणिक गतिविधियां चलाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, यूजीसी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. यह जनहित याचिका अधिवक्ता शशांक देव सुधि ने दायर की है. दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय द्वारा दिल्ली से बाहर चलाए जा रहे शैक्षणिक गतिविधियों को तुरंत बंद करने का आदेश देने की मांग की गई है.
GGSIPU के ऑफ-कैंपस संचालन पर उठे सवाल
याचिका में कहा गया है कि गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय ने अपनी वैधानिक सीमा के बाहर जाकर हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के शैक्षणिक गतिविधियों को चला रहा है. यह कदम जीजीएसआईपीयू अधिनियम 1998 और संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है, क्योंकि विश्वविद्यालय केवल दिल्ली के सीमा के भीतर ही कार्य कर सकता है. दायर याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के नियमों के तहत किसी भी विश्वविद्यालय को फ्रेंचाइजी, अप्रूव्ड न किए गए स्टडी सेंटर या ऑफ-कैंपस व्यवस्थाओं के जरिए कार्यक्रम चलाने की अनुमति नही है.
याचिका में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा दिल्ली से बाहर कॉलेजों को संबद्ध करना और परीक्षाएं/प्रवेश कराना यूजीसी के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि दिल्ली के छात्रों के लिए 85 फीसदी आरक्षण कोटा लागू है, लेकिन जब दिल्ली से बाहर के कॉलेजों को जीजीएसआईपीयू के अंतर्गत लाया जाता है, तो इस आरक्षण के क्रियान्वयन में कानूनी अस्पष्टता पैदा होती है. इससे दिल्ली के योग्य छात्रों को भेदभावपूर्ण प्रवेश प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है और उन्हें उनके वाजिब अवसरों से वंचित होना पड़ता है.
पहले से प्रवेश ले चुके छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, बने विशेष प्रबंध- कोर्ट
याचिकाकर्ता ने दायर याचिका में यह भी कहा है कि जीजीएसआईपीयू अधिनियम 1998 स्वयं ही संविधान के अनुच्छेद 239 AA और अनुच्छेद 245 का उल्लंघन करता है. अनुच्छेद 239 AA (3) के अनुसार दिल्ली विधानसभा केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी दिल्ली एनसीआर के भीतर कानून बना सकती है, लेकिन इस अधिनियम ने दूसरे राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल दिया है. याचिका में कहा गया है कि दिल्ली की विधानसभा ने संसद के अधिकार का अतिक्रमण किया है और अधिनियम बनाकर अन्य राज्यों के क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है. याचिका में यह भी मांग की गई है कि जिन छात्रों ने पहले से ही प्रवेश लिया है, उनके लिए विशेष प्रबंध किया जाए ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो.
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-भारत एक्सप्रेस
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