Sushila Karki Nepal PM: नेपाल में तख्तापलट के 3 दिन बाद आज शाम सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में चुन ली गईं. वे राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार रात 8:45 बजे शपथ ग्रहण करेंगी. पिछले कई दिनों से नेपाली आर्मी, राष्ट्रपति और Gen-Z नेताओं की कई बैठकें हुई थीं, जहां यह फैसला लिया गया कि अंतरिम सरकार का मुखिया कौन होगा. बताया जाता है कि कार्की के साथ आज कुलमान घीसिंग, ओम प्रकाश अर्याल, बालानंद शर्मा मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं.
नेपाली महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं कार्की
सुशीला कार्की नेपाल की एक प्रमुख कानूनी हस्ती हैं. उन्होंने नेपाल की न्यायपालिका में एक ऐतिहासिक और प्रभावशाली करियर बनाया है. उनका जीवन, विशेषकर उनका करियर, नेपाल की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है.
सुशीला कार्की का जन्म, शिक्षा और डिग्री
सुशीला कार्की का जन्म 7 जून, 1952 को नेपाल के शंकरपुर, मोरंग जिले में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मोरंग में ही पूरी की. उसके बाद, उन्होंने भारत के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की. बाद में, उन्होंने त्रिभुवन विश्वविद्यालय से कानून (Bachelor of Laws) की डिग्री प्राप्त की.

कानूनी करियर: 1979 में वकालत शुरू की
अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, सुशीला कार्की ने एक वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया. वह 1979 में वकालत के पेशे में शामिल हुईं और 2007 तक एक कुशल वकील के रूप में काम किया. उनका कानूनी करियर ईमानदारी और समर्पण के लिए जाना जाता है.
2007 में, उन्हें नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में अस्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया. 2012 में, उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया. उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसले दिए, जिनमें भ्रष्टाचार और मानवाधिकार से जुड़े मामले शामिल थे.
11 जुलाई, 2016 को, सुशीला कार्की ने नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. यह नेपाल के कानूनी इतिहास में एक मील का पत्थर था. मुख्य न्यायाधीश के रूप में, उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत की. उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कई सुधार किए.

संवैधानिक पद से राजनीति तक
सुशीला कार्की का कोई सीधा राजनीतिक करियर नहीं रहा है. वह एक संवैधानिक पद पर रही हैं और उन्होंने हमेशा न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखी है. उनका नाम राजनीतिक विवादों से दूर रहा है, और यही कारण है कि संकट की स्थिति में एक अंतरिम नेता के रूप में उनका चयन एक अच्छा विकल्प है. उनकी कानूनी पृष्ठभूमि उन्हें संवैधानिक प्रक्रियाओं को समझने और देश को सही दिशा में ले जाने में मदद कर सकती है.
यह भी पढ़िए: सुशीला कार्की का BHU से है गहरा नाता, पढ़ाई के दौरान इस शख्स से हुआ प्यार, नेपाल के प्लेन हाईजैकर से की शादी
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

