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World Alzheimer’s Day 2025: देश में 88 लाख लोग डिमेंशिया से पीड़ित, आखिर क्यों होता है अल्जाइमर? AIIMS के एक्सपर्ट से जानिए

World Alzheimer’s Day 2025: भारत में फिलहाल डिमेंशिया के 10 में से केवल 1 मरीज का ही समय पर सही निदान हो पाता है, जबकि बाकी लोग लंबे समय तक अनजाने में लक्षणों से परेशान होते रहते हैं. World Alzheimer’s Day के अवसर पर Delhi Aiims न्यूरोलॉजी की डॉ मंजरी त्रिपाठी ने बताए उपाय…

AIIMS Delhi Head of Neurology Dr. Manjari Tripathi

डॉ मंजरी त्रिपाठी, प्रमुख न्यूरोलॉजी, Aiims Delhi.

World Alzheimer’s Day 2025: हर साल 21 सितंबर को वर्ल्ड अल्ज़ाइमर डे (World Alzheimer’s Day) मनाया जाता है. यह एक गंभीर बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने और समझने की शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है. नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, मानसिक सक्रियता और सामाजिक जुड़ाव से व्‍यक्ति इससे लड़ पाता है.

अल्जाइमर दिवस 2025 के मौके पर दिल्‍ली AIIMS (AIIMS) के न्यूरोलॉजी और एनाटॉमी डिपार्टमेंट ARDSI दिल्ली चैप्टर ने भारत में डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की मुहिम को तेज़ कर दिया है. इस साल की थीम है – “डिमेंशिया के बारे में पूछिए, अल्जाइमर के बारे में पूछिए” (“Ask About Dementia, Ask About Alzheimer’s).

स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर निदान और जीवनशैली में सुधार से इस दिक्‍कत को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

भारत में 88 लाख बुजुर्ग अल्जाइमर से प्रभावित

आंकड़े बताते हैं कि देश में करीब 88 लाख बुजुर्ग डिमेंशिया के साथ जी रहे हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से सिर्फ 10 प्रतिशत मरीजों का ही सही निदान हो पाता है. गलत या देर से पहचान होने की वजह से मरीजों और उनके परिवारों को समय पर इलाज और सहयोग नहीं मिल पाता.

AIIMS की वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट और ARDSI दिल्ली चैप्टर की अध्यक्ष डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने कहा, ‘पूछना ही समझने की दिशा में पहला कदम है. जब तक हम डिमेंशिया और अल्जाइमर को लेकर चुप्पी तोड़ेंगे नहीं, तब तक लोग मदद लेने से हिचकिचाएंगे. प्रारंभिक पहचान से न सिर्फ बीमारी की गति धीमी होती है, बल्कि मरीजों की गरिमा और जीवन की गुणवत्ता भी बरकरार रहती है.’

इस तरह 40% तक कम हो सकता है खतरा

विशेषज्ञों के मुताबिक धूम्रपान और शराब से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि, और मधुमेह व उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों पर नियंत्रण डिमेंशिया के खतरे को 40 प्रतिशत तक घटा सकते हैं. यही वजह है कि AIIMS और ARDSI लगातार सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान चला रहे हैं.

तुगलकाबाद एक्सटेंशन: दिल्ली का डे-केयर मॉडल

तुगलकाबाद एक्सटेंशन स्थित ARDSI दिल्ली चैप्टर का डे-केयर सेंटर राजधानी के उन गिने-चुने केंद्रों में से एक है, जहां डिमेंशिया से जूझ रहे बुजुर्गों को संपूर्ण देखभाल मिलती है. फिलहाल यहां 11 मरीजों को प्रतिदिन घर से सुरक्षित परिवहन की सुविधा दी जाती है. इस सेंटर पर संज्ञानात्मक उत्तेजना (Cognitive Stimulation), फिजियोथेरेपी, रचनात्मक गतिविधियां और भावनात्मक सहयोग के जरिए मरीजों की स्वतंत्रता और आत्मसम्मान बनाए रखने की कोशिश की जाती है.

यह जगह परिवारों के लिए किसी जीवनरेखा से कम नहीं है. AIIMS और ARDSI का कहना है कि वे न केवल वैज्ञानिक शोध और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को लागू करने पर जोर देंगे, बल्कि सामुदायिक स्तर पर समर्थन नेटवर्क तैयार करने की दिशा में भी काम करेंगे.

अभी हर 10 में से 1 मरीज का ही हो पा रहा निदान

भारत में डिमेंशिया अब एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है. ताज़ा अनुमान बताते हैं कि देश में करीब 88 लाख वरिष्ठ नागरिक इस बीमारी से जूझ रहे हैं. चिंताजनक बात यह है कि हर 10 में से केवल 1 मरीज का ही समय पर सही निदान हो पाता है, जबकि बाकी लोग लंबे समय तक अनजाने में लक्षणों से परेशान होते रहते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रोग की पहचान शुरुआती दौर में हो जाए तो मरीज की देखभाल की बेहतर योजना बनाई जा सकती है और लक्षणों पर काफी हद तक नियंत्रण संभव है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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