SCO Youth Writers Conference: नई दिल्ली में 25-26 सितंबर 2025 को शिक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के सहयोग से दूसरा द्विवार्षिक एससीओ युवा लेखक सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. इस आयोजन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत ने निभाई. सम्मेलन का उद्घाटन विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने किया. उन्होंने कहा कि एससीओ सिर्फ राजनीतिक और आर्थिक मंच नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव का भी सशक्त माध्यम है.
सम्मेलन की शुरुआत और प्रमुख वक्ताओं की बातें
मुख्य अतिथि संजय कुमार (सचिव, स्कूली शिक्षा विभाग) ने साझा साहित्य और संस्कृति के ज़रिए एससीओ देशों के बीच सभ्यतागत रिश्तों को मजबूत करने की बात कही. उन्होंने तकनीकी प्रगति के साथ पुस्तकों को सीखने का अहम साधन बताया। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव आलोक ए. डिमरी ने युवाओं के बीच सहयोग की भावना को सराहा. एससीओ सचिवालय की सलाहकार मिनारा रखानोवा ने भारत के प्रयासों की तारीफ की और युवा रचनात्मक प्रतिभाओं को समर्थन देने की आवश्यकता पर बल दिया.
लेखन से लेकर टेलीविजन तक विषयों की विविधता
सम्मेलन में लेखन, संगीत, सिनेमा, कला, रेडियो और टेलीविजन जैसे विषयों पर डिजिटलीकरण के प्रभावों पर गहन चर्चा हुई। लेखन सत्र में एआई और पारंपरिक प्रकाशन के बीच संतुलन पर विचार हुआ. चीन, उज्बेकिस्तान और रूस के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए. भारत से सालोनी मित्तल ने पारंपरिक प्रकाशन की गुणवत्ता पर जोर दिया.
संगीत और सिनेमा में डिजिटल बदलाव
संगीत सत्र में सामवेद से लेकर आज के डिजिटल प्लेटफॉर्म तक की यात्रा पर चर्चा हुई. वक्ताओं ने एआई की रचनात्मक क्षमता को स्वीकार करते हुए इसके दुरुपयोग को लेकर चेताया. सिनेमा सत्र में भारत और ईरान के सिनेमा के सामाजिक प्रभावों पर बात हुई. प्रो. मराठे ने कहा कि सिनेमा भारत की बदलती चेतना का प्रतिबिंब है और समानांतर सिनेमा को भी मान्यता मिलनी चाहिए.
कला, संस्कृति और शिक्षा नीति पर रोशनी
कला और संस्कृति सत्र में डिजिटल युग में कलात्मक अभिव्यक्ति और अभिलेखन पर चर्चा हुई. वक्ताओं ने भारत की नई शिक्षा नीति-2020 और ज्ञान भारत मिशन की उपलब्धियों को रेखांकित किया जिसमें 44 लाख से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण हो चुका है.
रेडियो और टेलीविजन की बदलती दुनिया
रेडियो सत्र में पॉडकास्टिंग के युग में मौखिक संस्कृति के पुनरुत्थान पर बात हुई. वक्ताओं ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को सांस्कृतिक पुल बताया. टेलीविजन सत्र में पारंपरिक और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग के अभिसरण पर चर्चा हुई. वक्ताओं ने तकनीकी, व्यावसायिक और विषयगत बदलावों को समझने की कोशिश की.
सम्मेलन का समापन और निष्कर्ष
सम्मेलन का समापन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक श्री युवराज मलिक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. समापन सत्र का संचालन कुमार विक्रम ने किया. सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि युवा रचनाकारों की दोहरी जिम्मेदारी है. वे तकनीकी उपकरणों को अपनाएं और साथ ही सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करें. प्रतिभागियों ने डिजिटल अंतर को कम करने, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और एससीओ देशों के बीच संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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