राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, वरिष्ठ वकीलों और कर्मचारियों ने शामिल होकर गांधी जी कि प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शों का नमन किया.
गांधी जी के शिक्षाएं समाज के मार्गदर्शक
आयोजित कार्यक्रम के दौरान मौजूद न्यायाधीशों और वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि गांधी जी के शिक्षाएं-सत्य, अहिंसा और न्याय आज भी हमारे समाज के मार्गदर्शक हैं. उन्होंने कहा कि गांधी जी ने न केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, बल्कि सामाजिक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, बल्कि समाजिक समरसता और न्याय को भी आजादी का अभिन्न हिस्सा माना.
हर वर्ग को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा
गांधी जी की ग्रामीण भारत, आत्मनिर्भरता और सरल जीवन पर आधारित विचारधारा को याद करते हुए न्यायधीशों और कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ वकीलों ने गांधी जी की ग्रामीण भारत, आत्मनिर्भरता और सरल जीवन पर आधारित विचारधारा को याद करते हुए कहा गया कि उन्होंने देश के हर वर्ग को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा और एक मजबूत राष्ट्रीय पहचान बनाई.
शास्त्री जी का नारा प्रासंगिक
वहीं कार्यक्रम में मौजूद न्यायाधीशों और वरिष्ठ वकीलों ने लाल बहादुर शास्त्री जी को भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी. उनके नारे जय जवान, जय किसान को आज भी प्रासंगिक बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि शास्त्री जी ने गांधी जी के मूल्यों को शासन और जनसेवा में उतारा. उन्होंने सरलता, ईमानदारी और सेवा भावना से देश का नेतृत्व किया. आयोजित कार्यक्रम में दोनों नेताओं की न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और समाज में समरसता लाने के प्रयासों को रेखांकित किया गया. उन्होंने कहा कि गांधी और शास्त्री जी की सोच आज भी लोकतंत्र को दिशा देने वाली जीवंत प्रेणना है.
ये भी पढ़ें: दिल्ली पुलिस और परिवार को बिना जानकारी दिए राजस्थान पुलिस द्वारा गिरफ्तारी, दिल्ली हाई कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





