दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रसार भारती (दूरदर्शन एवं आकाशवाणी) से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को ‘भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम’ या ‘टीम इंडिया’ के रूप में पेश करने से रोकने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि इस अदालत एवं आप अपने समय का बर्बाद कर रहे हैं.
इसपर याचिकाकर्ता ने बेहतर दलीलें देने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय मांगा, लेकिन पीठ ने उसे अस्वीकार करते हुए कहा कि क्या आपने बीसीसीआई का निर्णय पढ़ा है? आपको दस्तावेज़ पेश करने का समय तभी दिया जाएगा जब आप प्रथम दृष्टया यह साबित करें कि याचिका विचारणीय है. आपके मन में जो भी आएगा, वह जनहित याचिका का विषयवस्तु नहीं बन जाएगा.
दूरदर्शन द्वारा ‘टीम इंडिया’ के रूप में पेश करना वैध
आप कैसे कह सकते हैं कि टीम भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करती? जो टीम हर जगह जाकर खेल रही है, वे गलत तरीके से देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है. अगर दूरदर्शन या कोई अन्य प्राधिकरण इसे टीम इंडिया के रूप में पेश करता है, तो क्या यह टीम इंडिया नहीं है? क्या आज किसी भी व्यकित को अपने घर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने से मना किया गया है.
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील रीपक कंसल ने दायर की थी. रीपक कंसल द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि टीम का इस तरह का चित्रण जनता को गुमराह करता है और राष्ट्रीय प्रतीकों के उपयोग से संबंधित कानूनों का उल्लंघन करता है. उन्होंने यह भी कहा था कि बीसीसीआई के एक निजी संस्था होने के नाते टीम को ‘टीम इंडिया’ कहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
खासकर जब भारत सरकार से कोई अनुमति न हो. इस दलील को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि क्या आप कह रहे हैं कि टीम भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करती? जो टीम हर जगह जाकर खेल रही है, वे गलत प्रतिनिधित्व कर रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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