मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 11 नवंबर को सुनवाई करेगा. एनजीओ एडीआर की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आप इसे कब चाहते हैं? इसपर याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि जितनी जल्दी हो सके, क्योंकि यह मामला हमारे चुनावी लोकतंत्र की जड़ों तक जाता है. उन्होंने कहा कि हम दो घंटों स्व ज्यादा समय नही लेंगे.
याचिकाकर्ताओं ने रोक लगाने की रखी मांग
पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि यह हमारे लोकतंत्र के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. भूषण ने कोर्ट से रजिस्ट्री को आदेश देने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने कहा था कि कोर्ट रजिस्ट्री को आदेश नही दे सकता. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि अगर कोई महत्वपूर्ण मामला नही आया तो हम उम्मीद करते हैं और मामला सुनवाई पर आ जाएगा.
यह याचिका एनजीओ एडीआर, मध्य प्रदेश से कांग्रेस नेता जया ठाकुर सहित अन्य की ओर से दायर की गई है. याचिका में नए कानून पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है. जया ठाकुर का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियां नए कानून के तहत तब भी की जा रही है, जब याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
दायर याचिका में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति से हटाना अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ और अन्य के मामले का उल्लंघन है. अनूप बरनवाल मामले में फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा था कि पैनल में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होने चाहिए.
याचिकाकर्ता बोले– सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी की
वही, नए कानून में सीजेआई की जगह कैबिनेट मंत्री को बतौर सदस्य रखा गया है. याचिका में यह भी कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है. 2 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसमें कहा गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति तीन सदस्यीय पैनल की तरफ से की जाएगी. इसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे.
केंद्र सरकार ने 2023 में जो कानून बनाया है उसमें सिलेक्शन कमिटी में चीफ जस्टिस को हराकर उनकी जगह पीएम की ओर से नामित केंद्रीय मंत्री को रखा गया है. इस तरह से सिलेक्शन प्रक्रिया खतरे में होगी और हेरफेर का आदेश है क्योंकि सिलेक्शन प्रक्रिया एग्जेक्युटिव के कंट्रोल में होगा. इससे पहले याचिकाकर्ता जया ठाकुर की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा था कि जब कोई फैसला सुनाया जाता है तो कोई उल्लंघन नही हो सकता है. उन्होंने तर्क दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 में स्पष्ट उल्लंघन हुआ है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




