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‘हम भी बोलेंगे- ‘I Love Muhammed’ बस तुम…’, मुसलमानों के सामने धीरेंद्र शास्त्री ने रखी शर्त

‘I Love Muhammed’ स्लोगन पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश धीरेंद्र शास्त्री का बयान आया है. उन्होंने मुस्लिम समुदाय के सामने एक शर्त रख दी है और कहा है हम भी आपका नारा बोलेंगे.

Dhirendra Shastri On I Love Mohammed

मुसलमानों और ईसाइयों पर क्या बोले बाबा बागेश्वर?

Dhirendra Shastri On I Love Muhammed: उत्तर प्रदेश के कानपुर से शुरू होकर देश के कई शहरों में गूंजे ‘I Love Muhammed’ के नारे पर उठे विवाद ने देश में सांप्रदायिक सद्भाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक नई बहस छेड़ दी थी. अब इस पूरे मामले पर बागेश्वर धाम के नाम से मशहूर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बेबाक बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्हें इस नारे से कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि वह खुद भी ‘आई लव मोहम्मद’ बोलने को तैयार हैं, लेकिन बदले में दूसरे समुदाय को भी हमारी एक शर्त माननी होगी.

धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि हमें तलवार की लड़ाई में विश्वास नहीं है, बल्कि विचारों की लड़ाई में विश्वास है. उन्होंने 7 नवंबर से दिल्ली से वृंदावन तक 10 दिवसीय पदयात्रा की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य हिंदुओं, हिंदुत्व और हिंदुस्तान को बढ़ावा देना है. यह यात्रा जातिवाद को अस्वीकार करने और एकता को बढ़ावा देने के लिए है.

क्या शर्त रखी?

न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने समुदायों के बीच आपसी सम्मान बनाए रखने का आग्रह किया और साथ ही ‘सर तन से जुदा’ जैसे बयानों को देश के कानून और संविधान के खिलाफ बताते हुए कठोर निंदा की. उन्होंने कहा कि नारे से कोई आपत्ति नहीं है. वह खुद भी ‘I Love Muhammed’ बोलने को तैयार हैं. बदले में उन्हें  ‘आई लव महादेव’ के नारे से परेशानी नहीं होनी चाहिए. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुदायों के बीच आपसी सम्मान बना रहे.

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‘जातिवाद के नाम पर जहर न फैले’

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यह पहल समावेशी है और मुसलमानों या ईसाइयों के खिलाफ निर्देशित नहीं है. हम नहीं चाहते कि जातिवाद के नाम पर कोई जहर फैले. हम चाहते हैं कि इस देश में हिंदुओं, हिंदुत्व और हिंदुस्तान का जश्न मनाया जाए. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं की स्थिति, एकता और कट्टरता के विचार से संबंधित कई पहलुओं पर चर्चा की. उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदू खतरे में ही है और इसके लिए कथित अत्याचारों, घटती आबादी और कई राज्यों में हिंदुओं में गर्व की कमी के उदाहरण दिए.



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