सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में महिला सफाई कर्मियों से हुए दुर्व्यवहार के मामले की न्यायिक जांच और दिशा निर्देश देने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने याचिका दायर की है. विश्विद्यालय के तीन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने महिला सफाई कर्मियों से उनके प्राइवेट पार्ट की तस्वीरें मांगी, ताकि यह साबित हो सके कि उन्हें मासिक धर्म हो रहा है. घटना सामने आने के बाद विश्विद्यालय ने आरोपियों को निलंबित कर दिया हैं.
वही पुलिस ने आपराधिक धमकी, यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा को ठेस पहुचाने का इरादा और महिला पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग के आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की है. एससीबीए द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह घटना महिलाओं की गरिमा, निजता और शरीर की स्वायत्तता पर गंभीर आघात हैं. याचिका में हरियाणा सरकार के अलावे केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाया गया है.
SCBA ने सुप्रीम कोर्ट में उठाई आवाज़
याचिका में यह भी कहा गया है कि भविष्य में दोबारा घटना न घटे इसके लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की हैं ताकि कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थाओं में महिलाओं की स्वास्थ्य, गरिमा और निजता की रक्षा हो सके. मामला सामने आने के बाद हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने कहा कि महिल्स से पीरियड का सबूत मांगना इस से बेहूदा बात हो ही नही सकती. महिला आयोग ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए रोहतक पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर अब तक कि कार्यवाही रिपोर्ट मांगी है.
स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में घटा विवाद
बता दें कि यह घटना 26 अक्टूबर 2025 की हैं. विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हरियाणा गवर्नर अशीम कुमार घोष आए थे. ऐसे में रजिस्ट्रार ने 4 सफाईकर्मियों को जल्दी-जल्दी काम करने को बोला. महिलाकर्मियों ने जब उन्हें बताया कि उन्हें माहवारी हो रही है, उनकी तबियत नही ठीक है, तब सुपरवाइजर ने छुट्टी देने की बजाए उनसे कहा कि वो इस बात का सबूत दें.
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-भारत एक्सप्रेस
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