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उत्तराखंड में हल्द्वानी के बनभूलपुरा में जमीन विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 50 हजार लोगों के पुनर्वास और सुरक्षा पर जताया जोर

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की 29 एकड़ भूमि से कथित कब्जा हटाने के मामले में दी गई राहत को बरकरार रखा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश जारी किया.

Supreme Court

उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की 29 एकड़ जमीन को कब्जे के मामले में मिली राहत को बरकरार रखा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि रेलवे और सरकार की जमीन की पहचान कर ली गई हैं. उन्होंने कहा कि वह मुआवजा भी देने को तैयार है, लिहाजा जमीन को वापस दिलाया जाए. एएसजी भाटी ने कोर्ट को यह भी बताया कि मामले में रेलवे की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट फाइल कर दिया गया हैं.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को दो महीने में मामले पर ठोस प्रस्ताव कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था, साथ ही कोर्ट ने प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए भी कदम उठाने को कहा था. वही मामले की सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि केंद्र के साथ संयुक्त बैठक की गई और सर्वेक्षण किया गया है. जिसमें साढ़े चार हजार परिवारों की पहचान की गई है, और पुनर्वास नीति पर विचार किया जा रहा है. सरकार ने कहा था कि पीड़ितों की पुनर्वास के लिए अभी तक 40 हेक्टेयर भूमि की पहचान कर ली गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को फटकारा

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि जो लोग वहां रह रहे है, वो भी इंसान है. वे दशकों से रह रहे है. अदालतें निर्दयी नही हो सकती. कोर्ट ने कहा था कि अदालतों को संतुलन बनाए रखने की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच मामले में सुनवाई कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव, केंद्र सरकार के अधिकारी और रेलवे के अधिकारी मीटिंग कर, ये योजना बनाए कि आखिर लोगों का पुनर्वास किस तरह से होगा.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि रेलवे ने अब तक कोई कार्रवाई नही की है. अगर आप लोगों को बेदखल करना चाहते हैं तो नोटिस जारी करे. जनहित याचिका के साथ क्यों? इसका इस्तेमाल नही किया जा सकता है. वही रेलवे की तरफ से कहा गया था कि वो वंदे भारत ट्रेन वहां चलाना चाहता है. इसको लेकर प्लेटफार्म को बढ़ाने की जरूरत है.

सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास पर जोर दिया

दरअसल केंद्र सरकार द्वारा 2023 में पारित अंतरिम आदेश में संशोधन के लिए दायर किया गया था, क्योंकि विवाद में भूमि के एक हिस्से में रेलवे ट्रैक और हल्द्वानी रेलवे स्टेशन की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पूरे मामले में पुनर्वास के लिए विकल्प तलाशने की जरूरत है. फॉरेस्ट एरिया को छोड़कर किसी दूसरे लैंड को लेकर विकल्प को तलाशने की जरूरत है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था इस मामले में जल्द करवाई की जरूरत है. 4365 घर है, वहां पर 50 हजार लोग रह रहे है.

ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने कैश फॉर जॉब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित आरोपी और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी की अर्जी पर जारी किया नोटिस

-भारत एक्सप्रेस



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