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दोबारा नहीं होगी बच्ची की गवाही! SC ने पलटा गुजरात HC का फैसला, जानें क्या है मामला?

गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग बच्ची की दोबारा गवाही से किया इनकार कर दिया है. इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल में देरी पर चिंता जताई है.

Supreme Court Overruling Gujarat High Court Order Refused Minor Testify Again In Suicide Case

नाबालिग बच्ची की दोबारा गवाही कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें अभियोजन पक्ष को एक 11 साल की बच्ची को दोबारा गवाह के रूप में बुलाने की अनुमति दी गई थी. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने यह फैसला दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि धारा 31 सीआरपीसी का इस्तेमाल बहुत सीमित और सावधानी से किया जाना चाहिए और तभी किया जाए जब वह सच्चाई सामने लाने के लिए जरूरी हो. कोर्ट ने कहा कि-

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने 21 गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद, ट्रायल के अंतिम चरण में बच्ची को गवाह बनाने की अर्जी दायर की. इसके लिए कोई ठोस वजह या देरी का संतोषजनक कारण नहीं बताया गया था.

कोर्ट ने जताई आपत्ति

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की अनुमति देने से सिर्फ मुकदमा लंबा होगा और आरोपियों को नुकसान पहुंचेगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 311 की शक्ति व्यापक जरूरत है, लेकिन इसका प्रयोग केवल तभी होना चाहिए जब साक्ष्य सच्चाई तक पहुंचने के लिए अपरिहार्य हो. इस मामले में यह शर्त पूरी नहीं होती है.

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हाई कोर्ट का यह मान लेना कि बच्ची एक प्रत्यक्षदर्शी हो सकती है, केवल अनुमान पर आधारित है. रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि वह घटना के वक्त मौजूद थी या उसने सब कुछ देखा था. इसके अलावे कोर्ट ने बच्ची की गवाही की विश्वसनीयता पर गंभीर चिंता जताई है.

क्या है पूरा मामला

यह मामला 2017 का है. जब एक महिला ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. इसके एक महीने बाद बाद महिला के पिता ने पति और रिश्तेदार के खिलाफ धारा 498A, 306 आईपीसी और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी. उस समय दंपत्ति की बेटी करीब 4 साल की थी. पूरे ट्रायल के दौरान 21 गवाहों की गवाही हुई, लेकिन कहीं भी यह नहीं कहा गया कि बच्ची घटना की गवाह थी.

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घटना के करीब 7 साल बाद अभियोजन ने अब 11 साल की हो चुकी बच्ची को गवाह बनाने के लिए अर्जी दाखिल किया था. जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था. लेकिन गुजरात हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हुए बच्ची की गवाही कराने को कहा था.



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