सुप्रीम कोर्ट पिछले कुछ वर्षों में कई संवेदनशील और जटिल मामलों में निगरानी समितियां गठित की है. चाहे वह सुपरटेक रियल स्टेट घोटाला, मणिपुर हिंसा, पर्यावरण संरक्षण, या जेल सुधार जैसे मुद्दे हों. इसको लेकर सवाल उठने लगे है कि क्या न्यायिक प्रशासन का नया मॉडल है? या फिर कार्यपालिका की विफलता के संकेत है, जिसके चलते अदालत को अपनी भूमिका निभानी पड़ती है.
सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स सुपरनोवा रेजिडेंशियल टावर्स ईस्ट और वेस्ट को लेकर जम्मू कश्मीर के रिटायर्ड चीफ एम एम कुमार की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है. यह कमेटी इस प्रोजेक्ट की देखरेख करेगी और सभी काम समय पर पूरा हो यह सुनिश्चित करेगी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद 27 हजार फ्लैट खरीदारों को फ्लैट मिलने की उम्मीद जग गई है. इसके अलावे सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में जातीय हिंसा के पीड़ितों के राहत और पुनर्वास को लेकर कमेटी का गठन किया है. कोर्ट ने जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था.
मणिपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की विशेष निगरानी समिति
इस कमेटी में पूर्व जस्टिस गीता मित्तल के अलावे बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस शालिनी पी जोशी और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस आशा मेनन शामिल है. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2023 को पीड़ितों के राहत और पुनर्वास तथा उन्हें मुआवजा देने की निगरानी के लिए हाई कोर्ट की तीन पूर्व महिला जस्टिस की एक कमेटी गठित करने का आदेश दिया था. इसके अलावे महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस प्रमुख दत्तात्रेय पडसलगीकर को आपराधिक मामलों की जांच की निगरानी करने को कहा था. हालांकि गृह मंत्रालय ने भी मणिपुर में चल रही जातीय हिंसा की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था. सही ही कोर्ट ने जेल सुधारों को लेकर भी कमेटी का गठन किया है. यह कमेटी पूर्व न्यायाधीश अमिताभ रॉय की अध्यक्षता में गठित की गई है, जो देशभर में जेल सुधारों के सभी पहलुओं को.देखेगी और उनके लिए उपायों का सुझाव देगी. समिति महिला कैदियों से जुड़े मुद्दों को भी देखेगी.
सुप्रीम कोर्ट देशभर में 1382 जेलों में अमानवीय हालातों से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई कर रही है. इसके अलावे ट्रांसजेंडर महिला टीचर के मामले में सुनवाई के दौरान एक समिति का गठन किया है. कोर्ट ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे मुद्दों की जांच के लिए दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज आशा मेनन की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया है. गठित समिति में ट्रांस राइट्स एक्टिविट्स और विशेषज्ञ शामिल है.
व्यवस्था की विफलता या संवैधानिक मजबूरी?
समिति में सामाजिक न्याय, महिला और बाल विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालयों के सचिव शामिल है. समिति के अन्य सदस्य कर्नाटक स्थित ट्रांसजेंडर राइट्स एक्टिविट्स अकार्ड पधशाली, दलित अधिकार ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता ग्रेस बानू, तेलंगाना स्थित ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता वैजयंती वसंत मोगली, जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर गौरव मंडल, बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर लॉ एंड पॉलिसी में वरिष्ठ एसोसिएट नित्या राजशेखर और एसोसिएशन फॉर ट्रांसजेंडर हेल्थ इन इंडिया के रिटायर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर संजय शर्मा होंगे. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में एओआर अमित द्विवेदी ने कहा Separation of Powers को तीन हिस्सों में बांटा गया है, ताकि भ्रष्टाचार ना हो सके. आज की परिपेक्ष्य में अरावली को देखा जा सकता है.
कोर्ट ने अरावली को लेकर जो परिभाषा तय किया था, उसपर रोक लगाते हुए एक समिति का गठन किया गया है. मणिपुर हिंसा को लेकर समिति गठित की गई है, सुप्रीम कोर्ट को लेकर समिति गठित की गई है. ऐसा लग रहा है कि न्यायपालिका ही इसको लेकर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि आखिर सोचना पड़ेगा कि आखिर ये समितियां क्यों गठित की जा रही है. इसका मतलब यह है कि समाज को लग रहा है कि एक्सक्यूटिव एक्शन ने उसे न्याय नही मिल रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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