Baba Pramod Giri Jaldhara Tapasya: कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच जहां आम इंसान रजाई से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा, वहीं राजस्थान के बाढ़ रायल कैमला स्थित प्रसिद्ध सिद्ध पीठ पर भक्ति और शक्ति का एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है जिसे देखकर हर कोई हैरान है.
यहां प्रसिद्ध संत महंत प्रमोद गिरीजी महाराज ने अपनी 41 दिवसीय ‘जलधारा तपस्या’ शुरू कर दी है. बर्फ जैसे ठंडे पानी के बीच बैठकर की जाने वाली यह तपस्या इस बार अपनी 10वीं वर्षगांठ मना रही है.
हड्डियां कंपाने वाली ठंड में अनूठी साधना
यह तपस्या स्थल ‘दीवान का बाग’ और ‘नंगे बाबा की धूनी’ के नाम से जाना जाता है, जहां हर साल की तरह इस बार भी श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा के महंत गुरुदेव प्रमोद गिरीजी महाराज साधना में लीन हैं. जब रात का तापमान गिरकर जमाव बिंदु के करीब पहुंच जाता है, तब बाबा निरंतर गिरती ठंडी जलधारा के नीचे बैठकर प्रभु भक्ति करते हैं.
यह कठिन साधना 5 फरवरी तक इसी तरह अनवरत जारी रहेगी. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल शारीरिक बल नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और भक्ति की पराकाष्ठा है.
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अग्नि और जल दोनों में सिद्ध हैं बाबा
प्रमोद गिरी बाबा की यह साधना पहली बार चर्चा में नहीं आई है. इससे पहले प्रयागराज महाकुंभ के दौरान भी उन्होंने कई महीनों तक भीषण ठंड में जल तपस्या कर दुनिया को अचंभित कर दिया था.
दिलचस्प बात यह है कि बाबा सिर्फ ठंड में जल तपस्या ही नहीं करते, बल्कि जब मई-जून की तपती गर्मी में पारा 45 डिग्री के पार होता है, तब वे अपने चारों ओर धूनी (अग्नि) जलाकर ‘अग्नि तप’ भी करते हैं. प्रकृति के इन दोनों चरम रूपों को झेलना उनकी योग शक्ति का प्रमाण माना जाता है.
भक्तों का लगा है तांता
जैसे-जैसे बाबा की इस कठिन तपस्या की खबर फैल रही है, नंगे बाबा की धूनी पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है. प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग आसपास के गांवों और दूर-दराज के जिलों से बाबा के दर्शन करने पहुंच रहे हैं.
कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हो रहा है. लोगों का मानना है कि बाबा की इस कठिन साधना से क्षेत्र में सुख-शांति और खुशहाली आती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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