Land for Job case: लैंड फॉर जॉब से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में लालू प्रसाद यादव के करीबी और आरजेडी के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस मनोज जैन ने यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट 27 जनवरी को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
भोला यादव की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने जिन पांच लोगों को सरकारी गवाह बनाया है, उनका बयान कानून के अनुसार दर्ज नही किया गया है. इसलिए वह बयान अवैध और अमान्य है. भोला यादव इस मामले में सह आरोपी है. याचिका में कहा गया है कि इन लोगों का बयान मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 सीआरपीसी के तहत पहले दर्ज किया गया और उसके बाद में उन्हें माफी दी गई, जबकि कानून के अनुसार पहले माफी दी जानी चाहिए और उसके बाद उनका बयान दर्ज किया जाना चाहिए था.
माफी से पहले दर्ज हुआ बयान
मामले की सुनवाई के दौरान भोला यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा कि अभियोजन के पास उनके मुवक्किल के खिलाफ सरकारी गवाह के बयान के अलावा कोई ठोस सबूत नही है. वही मनिंदर सिंह ने कहा कि घोड़ा गाड़ी से पहले होना चाहिए. कानून के अनुसार पहले सीआरपीसी की धारा 306 के तहत माफी दी जाए, उसके बाद बयान दर्ज हो. यहां पर इसके उलट किया गया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया जा तथ्यों को सीलबंद लिफाफे में रखा गया और आरोपियों तक को इसकी जानकारी नही दी गई.
जस्टिस मनोज जैन ने उठाया सवाल
इसपर जस्टिस मनोज जैन ने सवाल किया कि अगर माफी से पहले बयान दर्ज किया जाए तो क्या नुकसान हो सकता है. उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि अदालत के पास बयान दर्ज होने के बाद माफी देना ज्यादा बेहतर होता है. हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को स्पष्ट किया कि ऐसा करने से जांच एजेंसी और सरकार के बीच लेन-देन की आशंका बढ़ जाती है. जिसे सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में गलत बताया गया है.
वही सीबीआई की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में सभी सरकारी गवाहों को सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत ही माफी दी गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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