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तख्तापलट की तैयारी या सैन्य दखल का बहाना? ईरान ने अमेरिका-इजरायल पर मढ़ा खूनी संघर्ष का दोष

Iran Protest: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को तेहरान में विदेशी डिप्लोमैट्स के साथ हुई एक मीटिंग में आरोप लगाया कि ईरान के मौजूदा हालात के पीछे अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है. घुसपैठियों को इजराइल की मोसाद इंटेलिजेंस एजेंसी ने मदद की थी.

Iran violence foreign conspiracy

ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिका और ईरान के बीच आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को तेहरान में विदेशी डिप्लोमैट्स के साथ हुई एक मीटिंग में आरोप लगाया कि ईरान के मौजूदा हालात के पीछे अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है.

ईरान में हिंसा शुरू होने के बाद अमेरिका ने कहा है कि अगर ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया, तो अमेरिकी सेना ईरान पर स्ट्राइक करेगी.

ईरान हिंसा में अमेरिका-इजरायल का हाथ

सोमवार को अराघची ने मीटिंग में कहा कि ईरान के पास ऐसे कई सबूत हैं जो दिखाते हैं कि देश में हाल की अशांति में अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है.

बता दें, ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद आया है, जिसमें ईरानी सुरक्षा बलों और आम लोगों में से कई लोगों की मौत हो गई है. प्रदर्शन के दौरान देशभर में कई मस्जिदों, मेडिकल सेंटरों और दूसरी इमारतों में आग लगा दी गई है.

ट्रंप चाह रहे सैन्य दखल का बहाना

अराघची के मुताबिक देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक और खूनी हो गए ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देश में सैन्य दखल देने का बहाना मिल सके. उन्होंने कहा कि हमारे पास ईरान में हाल के दिनों में हुई आतंकवादी कार्रवाइयों में अमेरिका और इजरायल के शामिल होने के कई दस्तावेज और सबूत हैं.

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प्रदर्शन में कुछ हथियारबंद लोग आए नजर

अराघची ने आगे कहा,

प्रदर्शन के दौरान कुछ हथियारबंद लोग भी नजर आए. तेहरान के पास ऐसे ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड हैं, जिनमें कथित तौर पर आतंकवादी गुर्गों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने, सुरक्षा और पुलिस बलों को निशाना बनाने और यहां तक कि शांतिपूर्वक रह रहे आम नागरिकों पर हमले के निर्देश दिए गए थे.

कई लोगों को पीछे से लगी गोलियां

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि मारे गए कई लोगों को पीछे से गोलियां लगीं. तेहरान के पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि कुछ गुर्गों को विदेशी ताकतों से सीधे आदेश मिले थे. इस बात का जीता-जागता सबूत है कि इन आतंकवादी कामों में अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है.

अराघची ने यह भी दावा किया कि घुसपैठियों को इजराइल की मोसाद इंटेलिजेंस एजेंसी ने मदद की थी. उन्होंने कहा कि फारसी बोलने वाले मोसाद के गुर्गों ने इन विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की थी.

-भारत एक्सप्रेस



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