नीट-पीजी 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट- ऑफ को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की गई है. नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने कट ऑफ को घटाया है. दायर जनहित याचिका में NBEMS द्वारा 13 जनवरी को जारी अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है. साथ ही न्यूनतम क्वालिफाइंग के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई है.
यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्यम सिंह राजपूत, वकील आदर्श सिंह और एओआर नीमा के माध्यम से समाजिक कार्यकर्ता एवं किसान नेता हरिशरण देवगन, डॉक्टर सौरव कुमार, डॉक्टर लक्ष्य मित्तल और डॉक्टर आकाश ने दायर की है.
दायर याचिका में कहा गया है कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा में न्यूनतम क्वालिफाइंग मानकों को इस तरह घटाना मनमाना, असंवैधानिक और अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है. याचिका में यह भी कहा गया है कि इस फैसले से रोगियों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की साख को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. उन्होंने कहा है कि पोस्टग्रेजुएट स्तर पर मेरिट से समझौता करना न केवल स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 के वैधानिक प्रावधानों का भी उल्लंघन है.
सामान्य वर्ग का कट-ऑफ घटाकर 7% किया गया
NBEMS द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक सामान्य वर्ग के लिए नीट पीजी का कट ऑफ 50 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत, वही आरक्षित वर्ग के लिए इसे 40 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत कर दिया है. ऐसे में अब नीट पीजी सीट ओ प्रतिशत वाले अभ्यर्थियों को मिल सकेगा. इस अधिसूचना के बाद उन एमबीबीएस डॉक्टर्स के लिए राहत है, जो पहले ऊंचे कट ऑफ के चलते काउंसलिंग में शामिल नही हो पा रहे है.
इस वर्ष 2.4 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा दिया था और 19 अगस्त को नतीजा घोषित किया गया था. लेकिन ऊंची कट ऑफ के चलते दूसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद भी 18000 से अधिक सीटें खाली रह गई. देश में कुल पीजी मेडिकल सीटें 65000 से 70000 के बीच है.
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-भारत एक्सप्रेस
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