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69,000 शिक्षक भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा- ‘क्या 6800 आरक्षित अभ्यर्थियों का हो सकता है समायोजन?’

69000 सहायक शिक्षक भर्ती विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है. कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा है कि क्या आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थियों को समायोजित किया जा सकता है, जबकि इस पर अंतिम फैसला जल्द आ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर क्या आरक्षित में रखे गए 6800 अभ्यार्थियों को समायोजित किया जा सकता है? इसपर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मसले पर सरकार से सलाह करके सूचित करेंगे.

हालांकि सरकार को इसको लेकर कोई आपत्ति नही है. जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच इससे संबंधित मामले की सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने यूपी सरकार से 10 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है. अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व आदेश पर रोक लगा दिया है. जिसमें 2020-2022 की सूचियों को रद्द कर दिया गया था और2019 की एटीआरई परीक्षा के आधार पर नई सूची बनाने का निर्देश दिया था. अभ्यर्थियों का आरोप है कि 69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में.बेसिक एजुकेशन रूल 1981 और रिजर्वेशन रूल 1994 का उल्लंघन किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदलेगा भविष्य

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि वह इस मामले के कानूनी पहलुओं को परख कर आदेश देगा. हाई कोर्ट ने आरक्षण नियमों का पालन न होने के आधार पर मेरिट लिस्ट रद्द कर दी थी. इसका असर लगभग 19000 ऐसे लोगों पर पड़ सकता है, जो 4 साल से नौकरी कर रहे हैं. कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा था कि वह अधिकतम सात-सात पन्नों में अपनी लिखित दलीलें जमा करवा दें. कोर्ट ने इसके लिए 2 नोडल अधिकारी तय किया था.

बता दें कि हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 69000 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा 2019 की एक जून 2020 को जारी चयन सूची व 6800 अभ्यर्थियों की पांच जनवरी 2022 की चयन सूची बनाने का आदेश दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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