मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाला मामले में व्हिसिल ब्लोवर डॉक्टर आनंद राय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट के तहत आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को भी रद्द कर दिया है.
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एससी/एसटी एक्ट के दायरे पर चर्चा की है और यह कार्रवाई कानून के अनुसार नहीं है. आनंद राय ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी.
आरोप तय करने का फैसला बरकरा
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक रैली के दौरान एक सांसद, विधायक और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कथित हिंसा और दुर्व्यवहार से जुड़े जाति आधारित अत्याचार के मामले में आरोप तय करने को बरकरार रखा गया था. इससे पहले जमानत पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा था कि उसने याचिकाकर्ता की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की है. अब तक उसके नाम पर 7 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है.
याचिकाकर्ता द्वारा व्यापम घोटाले का खुलासा करने का बदला लेने की बात झूठी है, क्योंकि व्यापम 2008 में प्रकाश में आया. जबकि साल 1999, 2000 और 2004 में चार एफआईआर दर्ज होने का पता चला है. आनंद राय के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने से हुई हिंसा पर पुख्ता सबूत हैं. इनके कारण ही राज्य में शांति व्यवस्था बिगड़ी और अफसरों पर हमला हुआ.
व्यापम घोटाले में मुख्यमंत्री और बड़े अधिकारियों को घेरा.
डॉक्टर आनंद राय व्यापम घोटाला को लेकर कई बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई बड़े अधिकारियों पर लगातार सवाल उठा चुके हैं. व्यापम घोटाला के समय आनंद राय ने दावा किया था कि उनके पास मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी बातचीत का वीडियो रिकॉर्डिंग भी है. इसके बाद से ही वे लगातार सरकार और सरकारी नीतियों पर सरकार के प्रति हमलावर थे.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

