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Valentine Day की वो खौफनाक दोपहर, मिनट 2 मिनट जानें कैसे हुआ था पुलवामा में आतंकी हमला

14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले ने देश को झकझोर दिया था. जानें उस काली दोपहर की पूरी कहानी और कैसे भारत ने बालाकोट एयर स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिलाई.

Pulwama Attack History

ये फोटो एआई द्वारा बनाई गई है.

14 फरवरी के आते ही युवाओं में Valentine Day की एक अलग ही होड़ मच जाती है. लेकिन ये दिन न केवल उन परिवारों के लिए बल्कि पूरे भारत के इतिहास में एक काला अध्याय बन चुका है. ये वो दिन है जो उजाले में भी रात के कालेपन का एहसास कराता है, इसलिए इसे भारत के इतिहास में ब्लैक डे कहा जाता है.  फरवरी की ये 14 तारीख और पुलवामा का मंजर दोनों के याद आते ही देश का कलेजा आज भी कांप उठता है. लोग इस तारीख को भूल सकते हैं लेकिन ये देश इस दिन को, इस तारीख को नहीं भूल सकता है.

आज से ठीक 7 साल पहले, यानी 2019 में इसी दिन कश्मीर की वादियों में जो हुआ, उसने पूरे देश को गहरे गम और गुस्से में डुबो दिया था. पुलवामा हमले की बरसी पर जब हम उन वीर जवानों को याद करते हैं, तो वो खौफनाक मंजर आंखों के सामने तैरने लगता है. आइए आज उस काली दोपहर की एक-एक बात को फिर से समझते हैं कि आखिर कैसे आतंकियों ने इस कायराना हरकत को अंजाम दिया और फिर भारत ने कैसे इसका चुन-चुनकर बदला लिया.

खौफनाक दोपहर और चंद सेकंड का धमाका

14 परवरी 2019, उस दिन CRPF का एक बड़ा काफिला जम्मू से श्रीनगर की तरफ बढ़ रहा था. नेशनल हाईवे पर करीब 78 गाड़ियां थीं, जिनमें 2500 से ज्यादा जवान सवार थे. सर्द मौसम और धुंध के बीच जवान अपनी ड्यूटी पर लौट रहे थे. दोपहर के करीब सवा तीन बज रहे थे जब अवंतीपोरा के पास एक संदिग्ध कार काफिले के साथ चलने लगी. सुरक्षा में तैनात जवान बार-बार उस कार को दूर हटने का इशारा कर रहे थे, लेकिन कार चलाने वाला आतंकी आदिल अहमद डार कुछ और ही ठान कर आया था.

जैसे ही काफिला लाटूमोड के पास पहुंचा, उस विस्फोटक से लदी कार ने CRPF की एक बस को जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर होते ही इतना भीषण धमाका हुआ कि उसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई. पल भर में हाईवे का वो हिस्सा मलबे और धुएं के गुबार में तब्दील हो गया. इस हमले में हमने अपने 40 जांबाज जवानों को खो दिया. पूरा देश सुन्न था और हर आंख नम थी.

पाकिस्तान को घर में घुसकर दिया जवाब

धमाके के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने गर्व से इसकी जिम्मेदारी ली, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस बार भारत खामोश बैठने वाला नहीं था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कह दिया था कि ‘बलिदान बेकार नहीं जाएगा’. हमले के ठीक 12 दिन बाद, यानी 26 फरवरी की रात को भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 विमानों ने सरहद पार की और बालाकोट में आतंकियों के ठिकानों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया.

इस एयरस्ट्राइक ने पाकिस्तान के गुरूर को मिट्टी में मिला दिया. अगले ही दिन जब पाकिस्तान ने हिमाकत दिखाई, तो हमारे विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने अपने मिग-21 से उनके आधुनिक एफ-16 को मार गिराया. हालांकि, इस दौरान अभिनंदन का विमान क्रैश हुआ और वे दुश्मन की जमीन पर जा गिरे, लेकिन भारत के कूटनीतिक दबाव के आगे पाकिस्तान को झुकना पड़ा और 60 घंटों के भीतर उन्हें ससम्मान वापस भेजना पड़ा.

शहीदों के बलिदान को नमन

आज पुलवामा हमले के सालों बाद भी देश अपने शहीदों के बलिदान को नमन करता है. यह हमला सिर्फ एक जख्म नहीं, बल्कि भारत की उस ताकत की याद भी दिलाता है जिसने दुनिया को बता दिया कि अब हम सहेंगे नहीं, बल्कि घर में घुसकर मारेंगे.

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-भारत एक्सप्रेस



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