अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान (Iran) के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त और आक्रामक रुख अपना लिया है. ट्रंप ने ईरान को खुली धमकी देते हुए परमाणु समझौते (Nuclear Deal) के लिए 10 से 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है. ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर ईरान उनकी शर्तें नहीं मानता है, तो अमेरिका उसके खिलाफ ‘लिमिटेड मिलिट्री स्ट्राइक’ (सीमित सैन्य हमला) करने से पीछे नहीं हटेगा. इस ऐलान के बाद मिडिल ईस्ट (Middle East) में एक बार फिर बड़े युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं.
‘या तो हम डील कर लेंगे या उनके लिए बुरा होगा’
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ईरान को न्यूक्लियर डील के लिए मजबूर करने के लिए शुरुआती ‘लिमिटेड मिलिट्री स्ट्राइक’ पर गंभीरता से विचार कर रहा है. वॉशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, “हम एक डील करेंगे या किसी न किसी तरह डील करेंगे… या तो हम डील कर लेंगे या उनके लिए बुरा होगा.” उन्होंने कहा कि अमेरिकियों को अगले 10 से 15 दिनों में पता चल जाएगा कि क्या होने वाला है.
क्या है प्लान?
मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर स्ट्राइक को मंजूरी मिलती है, तो शुरुआती तौर पर ईरान के कुछ सैन्य या सरकारी ठिकानों को टारगेट किया जाएगा. अगर ईरान इसके बाद भी परमाणु संवर्धन नहीं रोकता, तो हमलों का दायरा बढ़ाकर ईरानी सरकार के पतन तक ले जाया जा सकता है.
समंदर में उतरा ‘USS गेराल्ड आर. फोर्ड’
‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के अनुसार, अमेरिका सिर्फ धमकी नहीं दे रहा है, बल्कि उसकी सेना (पेंटागन) मिडिल ईस्ट में तेजी से अपनी तैनाती बढ़ा रही है. अमेरिका का सबसे घातक एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (USS Gerald R. Ford) और उसके वॉरशिप इस इलाके के करीब पहुंच रहे हैं. मार्च के मध्य तक अमेरिकी सेना के पूरी तरह से तैनात होने की उम्मीद है.
इजरायल में अमेरिका के पूर्व राजदूत डैनियल बी. शापिरो ने कहा है कि अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों से ईरान को भारी नुकसान होगा, हालांकि उन्होंने जवाबी कार्रवाई के जोखिमों की भी चेतावनी दी है.
‘हम जहाज गहराई में भेज देंगे’
ट्रंप की इस खुली धमकी के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (Ali Khamenei) ने भी तीखा पलटवार किया है. खामेनेई ने धमकी दी है कि उनकी सेना अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को डुबो सकती है और अमेरिकी सेना को इतनी जोर से मार सकती है कि वह फिर उठ न सके. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “बेशक, एक वॉरशिप खतरनाक होता है, लेकिन उस वॉरशिप से भी ज्यादा खतरनाक वह हथियार है जो उसे समुद्र की गहराई में भेज सकता है.”
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इन युद्ध जैसी धमकियों के बीच व्हाइट हाउस का कहना है कि दोनों पक्षों में कूटनीतिक बातचीत जारी है, हालांकि अभी भी मुद्दों पर भारी मतभेद है. ईरान का दावा है कि वह परमाणु हथियार नहीं चाहता और उसका यूरेनियम संवर्धन केवल नागरिक (Civilian) उद्देश्यों के लिए है. ट्रंप के पहले कार्यकाल (2015 की डील से हटने) के बाद से ही दोनों देशों के बीच यह तनाव चरम पर है.
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