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ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की ‘अंतिम तस्वीर’ सोशल मीडिया पर वायरल, जानें क्या है सच

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद वायरल हो रही उनकी ‘अंतिम तस्वीर’ पूरी तरह फर्जी है. एआई डिटेक्शन टूल्स और जांच में यह तस्वीर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा बनाई गई साबित हुई है.

Ali Khamenei Fake Photo circulating on social media

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर आग की तरह फैल रही है जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि यह ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की ‘अंतिम फोटो’ है. दावा किया जा रहा है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ ने यह तस्वीर जारी की है. लोग इसे सच मानकर धड़ल्ले से शेयर कर रहे हैं, लेकिन क्या यह वाकई सच है? आइए जानते है.

कैसे हुआ वायरल?

मामला तब शुरू हुआ जब 1 मार्च 2026 को थ्रेड्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक फोटो वायरल होने लगी. दावा था कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने सबूत के तौर पर अली खामेनेई की मौत के बाद की यह फोटो जारी की है. चूंकि मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, इसलिए लोग बिना सोचे-समझे इस तस्वीर को असली मान बैठे.

क्या है सच?

जब हमने इस दावे की तह तक जाने के लिए पड़ताल शुरू की, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं. सबसे पहली बात, ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद उनकी ऐसी कोई भी तस्वीर आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई है. अगर यह तस्वीर असली होती, तो दुनिया भर की मीडिया और आधिकारिक सरकारी चैनलों पर यह सबसे बड़ी हेडलाइन होती. लेकिन ऐसी कोई भी खबर कहीं नहीं मिली.

जांच को आगे बढ़ाते हुए हमने ‘गूगल लेंस’ और एआई डिटेक्शन टूल्स का सहारा लिया. ‘हाइव मॉडरेशन’ और ‘ट्रूथ स्कैन’ जैसे टूल्स ने साफ कर दिया कि यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है. वहीं, इस जैसी दिखने वाली एक वीडियो क्लिप पहले ही सोशल मीडिया पर मौजूद थी, जिसे जनवरी में ही पोस्ट कर दिया गया था, यानी मौत की घटना से बहुत पहले.

इससे साफ है कि वायरल थ्रेड पोस्ट और उससे किया गयी दावा झूठा और भ्रामक है. बता दें कि ये पहली बार नहीं जब अंतरराष्ट्रीय घटना के नाम पर एआई से बनी तस्वीरें वायरल की गई हों. मौजूदा दौर में ‘डीपफेक’ और ‘एआई जेनरेटेड कंटेंट’ का इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह करना बहुत आसान हो गया है. इसलिए ऐसे दावों को बिना पुष्टि के शेयर करने से बचें.

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-भारत एक्सप्रेस



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