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हाई कोर्ट से राहत के बाद अविमुक्तेश्वरानंद का हमला, यूपी सरकार को सुनाई खरी-खोटी; बोले- विरोधी पर ध्यान…

Swami Avimukteshwaranand Controversy: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. फैसले के बाद उन्होंने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया, जबकि समर्थकों में खुशी की लहर देखी गई.

Shankaracharya Avimukteshwaranand Allahabad High Court

Swami Avimukteshwaranand Controversy: बुघवार (25 मार्च) को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत मिली है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. जिसके बाद स्वमी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इसे न्याय की जीत बताया है.

क्या बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ पड़ी है. कोर्ट के फैसले को लेकर खुद अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि, “विरोधी पर ध्यान केंद्रित न करें. झूठ हमेशा पराजित होता है और सत्य की जीत हमेशा से होती रही है. जो भी विजय प्राप्त करना चाहता है, उसे इस सिद्धांत को अपनाना चाहिए कि मैं सत्य के साथ खड़ा रहूंगा. अंततः विजय उसी की होगी.”

‘आम जनता का कोर्ट पर भरोसा बढ़ा’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक समर्थक ने मीडिया से बातचीत में कहा “हमारे लिए बहुत बड़ी खुशी की बात है. इसके लिए कोर्ट का दिल से धन्यवाद. आज के फैसले के बाद आम जनता का भी कोर्ट और न्याय दोनों पर भरोसा बढ़ गया है”.

एक अन्य समर्थक ने कहा, “कोर्ट में लिखा होता है, ‘सत्यमेव जयते’, जिसका अर्थ है, सत्य की जीत होना. हमारे साथ भी यही हुआ है, सत्य की जीत हुई है और असत्य हार गया है. न्यायालय ने जो फैसला सुनाया है, वो साधारण नहीं है क्योंकि पोस्को के केस में ऐसा फैसला पहली बार सुनाया गया है. आगे आने वाले समय में वकील इसी केस का उदाहरण पेश किया करेंगे.”

क्या था मामला?

मामला यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है, जो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज में दर्ज किया गया था. पहले एक स्थानीय अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया था कि इन आरोपों के आधार पर शंकराचार्य और उनके एक शिष्य के खिलाफ FIR दर्ज की जाए. अदालत के आदेश के बाद झूसी थाने में केस दर्ज कर लिया गया. यह शिकायत शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की ओर से दी गई थी, जिसमें सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी.


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कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें

कोर्ट में सुनवाई के दौरान शंकराचार्य की ओर से उनके वकील पी. एन. मिश्रा ने पक्ष रखा. वहीं, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल मौजूद रहे. शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की ओर से वकील रीना सिंह ने अपनी दलीलें पेश कीं. इससे पहले, 24 फरवरी को शंकराचार्य ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी.

-भारत एक्सप्रेस



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