भारत के पास 700 अरब डॉलर+ का विदेशी मुद्रा भंडार
SBI Research Report: पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के चलते दुनियाभर में महंगाई बढ़ रही है. भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर की तुलना में गिरता जा रहा है, ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपने विदेशी मुद्रा भंडार के जरिए रुपए की स्थिति को संभालने में लगी है. एक ताजा रिपोर्ट कहती है कि भारत के पास अभी 700 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है.
यह रकम इतनी है कि रुपए की स्थिति को संभालने और उसमें तेज उतार-चढ़ाव रोकने के लिए पर्याप्त है. एसबीआई रिसर्च की नई रिपोर्ट के मुताबिक, यह राशि 10 महीने से ज्यादा के आयात को कवर कर सकती है. कम समय के कर्ज भी हमारे विदेशी मुद्रा भंडार के सिर्फ 20% के बराबर हैं. इससे रुपया तेजी से गिरने से बच जाएगा.
रुपए पर दबाव और जोखिम
एसबीआई की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अस्थिर पूंजी प्रवाह और तेल की ऊंची कीमतें निकट भविष्य में समस्या पैदा कर सकती हैं. तेल आयात के लिए रोजाना 250-300 मिलियन डॉलर की जरूरत पड़ रही है. एसबीआई रिसर्च ने सुझाव दिया है कि तेल विपणन कंपनियों (OMC) के लिए एक खास डॉलर विंडो खोली जाए. इससे वास्तविक डॉलर की मांग और सप्लाई साफ दिखेगी और बाजार में अनावश्यक अस्थिरता रुकेगी.

RBI के कदम और सुझाव
आरबीआई ने रुपए को सहारा देने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं. लेकिन रिपोर्ट कहती है कि गिरावट देश के मजबूत आर्थिक आधार से ज्यादा है. इसलिए हस्तक्षेप तेज करने की जरूरत है. रिपोर्ट में दो बड़े सुझाव दिए गए हैं. पहला, ट्रेडिंग बुक पर सिर्फ 100 मिलियन डॉलर की सीमा लगाई जाए, पूरे बैंक बुक पर नहीं. इससे बैंकिंग कामकाज में परेशानी नहीं होगी. दूसरा, ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ अपनाया जाए. इसमें छोटी अवधि के ब्याज दर बढ़ाई जाए और लंबी अवधि की घटाई जाए. इससे विभिन्न दरें तय सीमा में रहेंगी और नीतिगत दर से मेल खाएंगी.
अन्य उपायों की सिफारिश
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि बाहरी बाजारों से जरूरी मुद्राएं लाकर और वैकल्पिक तरीके अपनाकर हस्तक्षेप बढ़ाया जाए. इससे रुपए में गिरावट को रोका जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी मजबूत है. इसे सिर्फ संकट के समय ही इस्तेमाल करने की पुरानी सोच बदलनी चाहिए. समय रहते बाजार में दखल देकर रुपए को मजबूत किया जा सकता है.
दुनिया के प्रमुख देशों के विदेशी मुद्रा भंडार (लेटेस्ट आंकड़े)
| रैंक | देश | राशि (अरब अमेरिकी डॉलर में) | मौजूदगी का महीना |
|---|---|---|---|
| 1 | चीन | 3,428 | फरवरी 2026 |
| 2 | जापान | 1,397 | जनवरी 2026 |
| 3 | स्विट्जरलैंड | 1,078 | दिसंबर 2025 |
| 4 | रूस | 802 | मार्च 2026 |
| 5 | भारत | 700+ | मार्च, 2026 |
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट साफ कहती है कि भारत के पास रुपए को मजबूत रखने का पर्याप्त बफर है. अगर सही समय पर नीतिगत कदम उठाए जाएं तो बाजार की अस्थिरता को काबू में रखा जा सकता है. आम आदमी के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि स्थिर रुपया महंगाई और आयात पर सकारात्मक असर डालता है.
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