Energy Crisis: अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमले के बाद से मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को आज 38 दिन हो चुके है. इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा पर होने वाले असर को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कतर के प्रधानमंत्री से चर्चा की. साथ ही जयशंकर ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर असर को लेकर बात की. विदेश मंत्री की ये बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है.
चर्चा में क्या हुई बात?
ट्रंप ने ईरान को कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz)’ की नाकाबंदी नहीं हटाई गई, तो ईरान को अपने पावर प्लांट्स गंवाने पड़ सकते हैं.
इसी बीच जयशंकर ने सोशल मीडिया के जरिए रविवार को ये बताया कि उनकी कतर के प्रधानमंत्री और यूएई (UAE) के विदेश मंत्री से बात हुई. हालांकि एस. जयशंकर ने ज्यादा जानकारी न देते हुए केवल इतना ही कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर यूएई के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अल नाहयान के साथ चर्चा की.
क्या भारत के लिए खुला है होर्मुज का रास्ता?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (तेल और गैस) के लिए मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट (Middle East) पर निर्भर है. ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को रोके जाने के बाद पूरे विश्व में तेल और गैस की समस्या और उनके कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. लेकिन ईरान नें भारत सहित अपने मित्र देशों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दे रखी है.
वहीं, भारत ने तनाव को देखते हुए कई कूटनीतिक प्रयास भी किए है जिससे ये संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त हो जाए. क्योंकि अगर ऐसा ही चलता रहा और इस मार्ग पर नाकाबंदी जारी रही तो केवल भारत नहीं बल्कि कई देशों को ईंधन और उर्वरक सुरक्षा का भारी संकट झेलना पड़ सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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