RBI repo rate unchanged 2026 EMI impact: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय अहम बैठक के नतीजों ने करोड़ों कर्जधारकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. बुधवार को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साल 2026 की पहली मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर यथावत रखने का फैसला किया है.
यह भी बताते चलें कि यह लगातार चौथी बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. गवर्नर ने साफ किया कि पश्चिम एशिया (ईरान-इजराइल) में जारी तनाव और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के कारण महंगाई का जोखिम अभी टला नहीं है, इसलिए दरों में कटौती का यह सही समय नहीं है.
ईरान-इजराइल युद्ध ने बिगाड़ा गणित?
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने संबोधन में वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि ईरान संकट की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था दबाव में है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल (क्रूड) के भाव में उतार-चढ़ाव सीधा खुदरा महंगाई को प्रभावित कर सकता है.
ऐसे में हमारा प्राथमिक लक्ष्य आर्थिक विकास दर (Growth) को बनाए रखना और महंगाई को काबू में रखना है. यही वजह है कि एमपीसी के ज्यादातर सदस्यों ने फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया.
ईएमआई (EMI) में राहत का इंतजार बढ़ा
आरबीआई के इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो अपने होम लोन या ऑटो लोन की किस्तों में कमी की उम्मीद लगाए बैठे थे. रेपो रेट वह बेंचमार्क है जिसके आधार पर बैंक अपनी ब्याज दरें तय करते हैं. चूंकि रेपो रेट में कोई कटौती नहीं हुई है, इसलिए आपकी मौजूदा ईएमआई में कोई बदलाव नहीं होगा.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले संकेत दिए थे कि कटौती की गुंजाइश बन सकती है, लेकिन आरबीआई ने ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाते हुए मध्यम वर्ग और घर खरीदारों को फिलहाल कोई राहत नहीं दी है.
अर्थव्यवस्था और विकास दर पर फोकस
गवर्नर ने भरोसा दिलाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत है, लेकिन बाहरी झटकों से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है. उन्होंने कहा कि दरों को स्थिर रखकर हम मार्केट में स्थिरता लाना चाहते हैं. अगर आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियां सुधरती हैं और महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहते हैं, तभी भविष्य में कटौती पर विचार किया जा सकता है.
फिलहाल, बैंक अपनी कर्ज की दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखेंगे, जिसका मतलब है कि नया लोन लेने वालों को भी अभी महंगी ब्याज दरों का ही सामना करना पड़ेगा.
मार्केट और निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
शेयर बाजार पहले से ही वैश्विक संकेतों पर रिएक्ट कर रहा था, ऐसे में आरबीआई का यह फैसला बहुत चौंकाने वाला नहीं रहा. हालांकि रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर को उम्मीद थी कि ब्याज दरें घटने से मांग में तेजी आएगी लेकिन अब इन सेक्टर्स को अगली तिमाही तक इंतजार करना होगा. जानकारों का मानना है कि आरबीआई ने महंगाई को रोकने के लिए ‘कठोर’ रुख अपनाया है, जो लंबी अवधि में अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर साबित हो सकता है, भले ही शॉर्ट टर्म में कर्जदारों को थोड़ी निराशा हुई हो.
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-भारत एक्सप्रेस
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