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ईरानी एंबेसी ने चाबहार को बताया भारत का ‘गोल्डन ब्रिज’! जानें 15,000 करोड़ के इस दांव से टेंशन में क्यों हैं चीन-पाकिस्तान?

भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने Chabahar Port को भारत-ईरान व्यापार का ‘Golden Bridge’ बताया. यह पोर्ट चीन-पाकिस्तान के Gwadar Port को टक्कर देने वाला भारत का सबसे बड़ा रणनीतिक दांव माना जा रहा है…

Chabahar Port India Iran: ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव और हालिया सीजफायर की खबरों के बीच वैश्विक व्यापार को लेकर हलचल तेज हो गई है. इसी कड़ी में भारत में स्थित ईरानी दूतावास (Iranian Embassy) ने चाबहार पोर्ट का एक विशेष वीडियो साझा करते हुए इसे भारत और ईरान के बीच व्यापार का ‘गोल्डन ब्रिज’ (Golden Bridge) करार दिया है.

बता दें कि ईरानी दूतावास का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस पोर्ट के संचालन को लेकर अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंधों की छूट की समय सीमा (Deadline) बेहद करीब है. यह पोर्ट न केवल भारत के लिए व्यापारिक गलियारा है बल्कि रणनीतिक रूप से चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ को जवाब देने का सबसे बड़ा हथियार भी है.

क्यों है यह भारत के लिए जरूरी?

दरअसल भारत और ईरान के बीच वर्तमान में करीब 15,000 करोड़ रुपये का द्विपक्षीय व्यापार होता है. चाबहार पोर्ट की अहमियत को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

1. पाकिस्तान को ‘बायपास’ करने का रास्ता: चाबहार के जरिए भारत, पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल किए बिना सीधे अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक अपनी पहुंच बना सकता है.

2. चीन के ‘ग्वादर’ को जवाब: पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित किए गए ग्वादर पोर्ट से चाबहार की दूरी महज 170 किलोमीटर है. यह हिंद महासागर और ओमान की खाड़ी में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करता है.

3. लागत में भारी कमी: कांडला पोर्ट से चाबहार की दूरी सिर्फ 550 नॉटिकल माइल है. इससे मध्य एशिया तक माल भेजने का खर्च और समय, दोनों में भारी कमी आती है.

चाबहार ग्लोबल ट्रेड का नया रूट: INSTC

आपको यह भी बताते चलें कि चाबहार पोर्ट केवल ईरान तक सीमित नहीं है. यह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का मुख्य द्वार है. इसके जरिए भारतीय सामान ईरान के रास्ते रूस और यूरोप तक बहुत कम समय में पहुंच सकता है. यदि अमेरिका इस मियाद को आगे बढ़ा देता है, तो भारत न केवल मिडिल ईस्ट में अपनी धाक जमाएगा, बल्कि व्यापारिक रूप से चीन के दबदबे को भी कड़ी चुनौती देगा.

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बिसनेस विजन: क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चाबहार पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देता है और प्रतिबंधों की बाधा स्थायी रूप से हट जाती है, तो भारत को तीन बड़े फायदे होंगे:

राजनीतिक मजबूती: मध्य एशिया के देशों में भारत का प्रभाव बढ़ेगा.

सस्ता ईंधन: ईरान से तेल और गैस की आपूर्ति अधिक सुगम और सस्ती हो जाएगी.

यूरोप तक सीधी पैठ: स्वेज नहर पर निर्भरता कम होगी और यूरोप के बाजारों तक पहुंच आसान होगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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