Kasganj liquor shop protest: कासगंज/जुम्मन कुरैशी: शराब पूरे परिवार और समाज की आत्मा को खोखला कर देती है. इस दर्द को उन महिलाओं से बेहतर कौन समझ सकता है, जो रोज अपने घर के मर्दों को इस जहर के घूंट पीते हुए देखती हैं. उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में एक बार फिर इसी जहर के खिलाफ महिलाओं का सब्र टूट गया. जनपद के सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के गांव ‘बस्तर मऊ’ में एक देसी शराब का ठेका अचानक युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया. महिलाओं का आक्रोश इतना भयंकर था कि उन्होंने न केवल ठेके में भारी तोड़फोड़ की, बल्कि एक मां, जिसके बेटे को इसी शराब ने निगल लिया था, उसने सबके सामने पेड़ से फांसी लगाकर जान देने की खौफनाक कोशिश की.
खौफ में भागा ठेका संचालक
बस्तर मऊ गांव (Bastar Mau village Kasganj) की दर्जनों महिलाएं कई दिनों से इस ठेके को हटाने की मांग कर रही थीं. जब उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो वे खुद ही सड़कों पर उतर आईं. आक्रोशित महिलाओं ने ठेके पर धावा बोल दिया, अंदर से शराब की पेटियां निकालकर बाहर सड़क पर फेंक दीं और जमकर तोड़फोड़ की. महिलाओं का रौद्र रूप देखकर वहां शराब पीने वालों में भगदड़ मच गई. हालात इतने बेकाबू हो गए कि ठेका संचालक अपनी जान बचाकर मौके से ही दुकान छोड़कर फरार हो गया.
बेटे की मौत और पेड़ पर फंदा (Kasganj Police rescue)
इस हंगामे के बीच एक ऐसा दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की रूह कंपा दी. ठेका हटाने की इस जिद के बीच एक महिला ने ठेके के ठीक सामने स्थित एक पेड़ से फांसी लगाने का प्रयास किया. गनीमत रही कि सूचना मिलते ही कई थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंच चुका था. पुलिसकर्मियों ने अपनी सूझबूझ से तत्काल दौड़कर उस महिला को फंदे से नीचे उतारा और उसकी जान बचा ली.
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह कोई आम विरोध नहीं था, बल्कि यह एक बेबस मां की चीख थी; क्योंकि कुछ दिन पहले ही इसी महिला के जवान बेटे की मौत अत्यधिक शराब पीने के कारण हो गई थी.
खराब होता गांव का माहौल
विरोध कर रही महिलाओं (कटोरी देवी और लीलावती) ने साफ शब्दों में बताया कि इस ठेके ने पूरे गांव का माहौल नरक बना दिया था. उनका आरोप है कि गांव के और बाहरी पुरुष दिन भर ठेके पर बैठकर शराब पीते हैं और वहां से गुजरने वाली बहू-बेटियों पर गंदी फब्तियां कसते हैं. अभद्र भाषा का इस्तेमाल आम बात हो गई थी, जिसके कारण महिलाओं का घर से निकलना मुहाल था.
क्या आंख बंद करके देते हैं लाइसेंस?
पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल इस ठेके को वहां से हटवा दिया गया है, लेकिन इस घटना ने आबकारी विभाग की कार्यशैली की पोल खोल कर रख दी है. सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि जब ठेके का लाइसेंस दिया जाता है, तो क्या उस जगह का भौतिक सत्यापन नहीं होता?
ग्रामीणों का कहना है कि जहां यह शराब का ठेका खुला था, उसके बिल्कुल पास ही एक पवित्र ‘मंदिर’ भी स्थित है. मंदिर के पास ठेका खोलने की अनुमति किसने और कैसे दे दी? इससे पहले भी कासगंज की गंगेश्वर कॉलोनी में महिलाएं इसी तरह का प्रदर्शन कर चुकी हैं.
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