Colorful Watermelon Farming: आमतौर पर जब भी हम तरबूज को काटते हैं, तो अंदर से लाल रंग का रसीला गूदा ही निकलता है. लेकिन, क्या हो अगर तरबूज अंदर से नीला, पीला या नारंगी निकले? हरियाणा के पानीपत जिले के सिवाह गांव के रहने वाले 63 वर्षीय किसान राम प्रताप शर्मा ने अपनी मेहनत, नवाचार और आधुनिक तकनीक के दम पर इस कल्पना को सच कर दिखाया है. वे अपने खेतों में 5 रंगों वाले विदेशी किस्म के तरबूज उगाकर न सिर्फ भारी मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि पूरे देश के किसानों के लिए एक बड़ी मिसाल भी पेश कर रहे हैं.
आधुनिक तकनीक को गले लगाया (watermelon farming instructional)
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राम प्रताप शर्मा ने कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर पारिवारिक खेती को अपना लिया था. उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर वर्ष 2011 में आधुनिक तकनीकों जैसे पॉलीहाउस, नेट हाउस और ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) का इस्तेमाल शुरू किया.
आज उनकी मेहनत का नतीजा है कि वे दिल्ली, गुरुग्राम, चंडीगढ़ और लुधियाना जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ कई उद्योगपतियों और ऑनलाइन कंपनियों को सीधे ताजे फल और सब्जियां सप्लाई कर रहे हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पास खेत होने के कारण वे महज चार मिनट में पानीपत मंडी तक अपनी उपज पहुंचा देते हैं.
1 लाख रुपये किलो वाला बीज (Taiwan watermelon seeds)
शर्मा की सबसे बड़ी पहचान उनके पांच रंगों वाले खास तरबूज हैं. उनके खेत में लाल, नारंगी, गहरे पीले, हल्के पीले और नीले गूदे वाले तरबूज पैदा होते हैं. इन खास तरबूजों को उगाने के लिए वे थाईलैंड और ताइवान से बीज मंगवाते हैं, जिसकी कीमत लगभग 1 लाख रुपये प्रति किलो है. एक एकड़ में लगभग 300 ग्राम बीज से 6000 पौधे तैयार हो जाते हैं. उन्होंने इन तरबूजों की ‘लो मंच’, ‘ऑरेंज मंच’ और ’24 कैरेट गोल्ड’ जैसी नई किस्में भी विकसित की हैं, जो बाजार में करीब 50 रुपये प्रति किलो के भाव पर हाथों-हाथ बिक जाती हैं.
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एक एकड़ में 4 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा (watermelon gardening tips)
राम प्रताप शर्मा के इस खेती मॉडल का गणित बहुत ही मुनाफेदार है. उनके अनुसार, एक एकड़ में विदेशी तरबूज की खेती करने पर करीब 2 लाख रुपये का खर्च आता है. लेकिन, जब फसल बाजार में बिकती है, तो इससे 6 लाख रुपये तक की कमाई आसानी से हो जाती है. यानी सारी लागत निकालने के बाद किसान को प्रति एकड़ सीधे तौर पर 4 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा मिलता है. तरबूज के अलावा वे 1.5 एकड़ में पालक, मेथी, अमरूद, आड़ू, ड्रैगन फ्रूट और अनार की खेती भी करते हैं. वे अंतरफसल पद्धति (Intercropping) अपनाते हुए ककड़ी के साथ तोरी और करेला भी उगाते हैं.
2019 मिला था पुरस्कार (watermelon tips)
राम प्रताप शर्मा के इस शानदार काम के लिए उन्हें साल 2019 में ‘कृषि रत्न’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. हरियाणा बागवानी विभाग के विशेषज्ञ भी उनकी इस सफलता की सराहना करते हैं. शर्मा का यह मॉडल साबित करता है कि अगर आधुनिक तकनीक, सही योजना और थोड़ी सी रिस्क लेने की क्षमता हो, तो छोटी सी जमीन से भी खेती को एक मुनाफे का ‘कॉरपोरेट बिजनेस’ बनाया जा सकता है.
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